क्या विवाहित बेटियां अपनी मां की पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांग सकती हैं


सवाल

मेरी माताजी का निधन वर्ष २०१४ में हुआ था और हमारी पैतृक संपत्ति वर्तमान में केवल मेरे पांच भाइयों के नाम पर दर्ज है, तो मैं यह जानना चाहती हूँ कि क्या हम तीन बहनों का भी इस संपत्ति में हिस्सा बनता है और यदि मेरी माताजी ने अपने जीवनकाल में बिना हमारी सहमति के भाइयों के नाम कोई उपहार पत्र या वसीयत कर दी थी तो क्या हम उसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं?

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हाँ, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, एक बेटी का अपने पिता और माता की पैतृक संपत्ति पर बेटे के बिल्कुल बराबर अधिकार होता है। वर्ष 2005 के कानूनी संशोधन के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट है कि बेटियाँ जन्म से ही सह-दायक (Coparcener) होती हैं, चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित। चूंकि आपकी माताजी का निधन 2014 में हुआ है, इसलिए आप और आपकी बहनें उस संपत्ति में कानूनी रूप से हिस्सा पाने की हकदार हैं जो आपकी माताजी को विरासत में मिली थी।

जहाँ तक संपत्ति के हस्तांतरण के तरीके को जानने का सवाल है, आप संबंधित जिले के उप-पंजीयक कार्यालय (Sub-Registrar Office) से संपत्ति के इतिहास और दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) प्राप्त कर सकती हैं। इससे यह पता चल जाएगा कि संपत्ति भाइयों के नाम पर उपहार पत्र (Gift Deed), बिक्री पत्र (Sale Deed) या विरासत (Inheritance) के माध्यम से कैसे स्थानांतरित हुई। यदि भाइयों ने विरासत के आधार पर नाम चढ़वाया है, तो वे कानूनी रूप से बहनों का हिस्सा दबा नहीं सकते।

यदि आपकी माँ ने अपने जीवित रहते कोई गिफ्ट डीड या बिक्री पत्र किया था, तो यह देखना होगा कि संपत्ति पैतृक थी या उनकी स्वयं की कमाई हुई। यदि संपत्ति पैतृक (Ancestral) थी, तो माँ को पूरी संपत्ति केवल बेटों के नाम करने का कानूनी अधिकार नहीं था और ऐसी स्थिति में आप उस हस्तांतरण को अदालत में चुनौती (Challenge) दे सकती हैं। हालांकि, अगर संपत्ति उनकी अपनी कमाई हुई थी, तो वह उसे किसी को भी देने के लिए स्वतंत्र थीं।

यदि भाइयों के नाम पर कोई वसीयत (Will) है, तो भी आप उसे अदालत में चुनौती दे सकती हैं। यदि वसीयत का प्रोबेट (Probate) मांगा जाता है, तो अदालत सभी कानूनी वारिसों को नोटिस (Notice) जारी करती है। आप वहां अपनी आपत्ति दर्ज कर सकती हैं कि वसीयत फर्जी है या दबाव में बनवाई गई है। माँ द्वारा बच्चों के बीच किया गया भेदभाव अक्सर वसीयत को चुनौती देने का एक मजबूत आधार बनता है, विशेषकर यदि पैतृक संपत्ति में बेटियों का हिस्सा छीना गया हो।

भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) के दौर में भी दीवानी संपत्तियों के अधिकार मुख्य रूप से उत्तराधिकार कानूनों से ही तय होते हैं। आपको तुरंत एक वकील के माध्यम से संपत्ति के विभाजन (Partition Suit) के लिए मुकदमा दायर करना चाहिए। इससे आप अपना हक प्राप्त कर सकेंगी और भाइयों द्वारा संपत्ति को आगे बेचने या नष्ट करने पर रोक (Stay Order) भी लगवा सकेंगी।


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