सवाल


मेरी माँ की मृत्यु 87 की उम्र में 13-4-14 को हो गयी थी, हम 5 भाई और 3 बहन हैं। विरासत में मिली संपत्ति केवल भाइयों के नाम पर है।
1. क्या हम बेटियों के पास संपत्ति में अधिकार हैं, और किन परिस्थितियों में अधिकार नहीं है।
2. हम हस्तांतरण के तरीके के बारे में कैसे जान सकते हैं?
3. क्या मेरी मां अपने जीवित रहते हमारे भाइयों के नाम के बिना बेटियों की सहमति के किसी उपहार पत्र / विक्रिय पत्र / उनके नाम पर पंजीकरण के माध्यम से या किसी अन्य तरीके से संपत्ति का हस्तांतरण कर सकती है? क्या इसे चुनौती दी जा सकती है?
4. अगर पुत्रों के नाम पर वसीयत है तो क्या हम बेटियों के पास अधिकार का कोई दावा है (प्रोबेट के मामले में क्या?)
5. यदि ऐसा है, तो क्या मेरी माँ द्वारा किए गए भेदभाव को चुनौती दी जा सकती है?

उत्तर


अब परिवार की पैतृक संपत्ति में विवाहित महिलाओं का बराबर हिस्सा होता है और इसलिए एक बेटी और बेटे का हिस्सा सममूल्य है। हम ये मान कर चल रहे है कि आप हिंदुओं का एक परिवार हैं।

हालांकि, अगर संपत्ति स्वयं अधिग्रहीत की गयी हो और पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली हो तो आपकी मां इसे किसी भी तरीके से निपटाने की हकदार है। यदि यह पैतृक संपत्ति है तो आपको अपने हिस्से का दावा करने के लिए विभाजन का एक मुक़दमा दर्ज करना चाहिए।

जहाँ तक किसी उपहार पत्र / विक्रिय पत्र का प्रश्न है आपकी माँ के दस्तावेज़ों को देख कर ही पता चल सकेगा। और इसे चुनौती दी जा सकेगी।

प्रोबेट केवल लाभार्थी को प्रदान की जा सकती है और इसे भी चुनौती दी जा सकती है।

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