क्या बेटी अपनी शादी के खर्च के लिए पिता से पैसे मांग सकती है


सवाल

भारत में एक बेटी का अपनी शादी के खर्च के लिए अपने पिता से पैसे मांगने का क्या कानूनी अधिकार है? क्या कोई बालिग बेटी, जो खुद कमाने में सक्षम है, फिर भी अपने पिता से शादी के लिए आर्थिक मदद का दावा कर सकती है और इस संबंध में कानून क्या कहता है?

उत्तर (5)


339 votes

भारत में हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम के तहत एक अविवाहित बेटी को अपने पिता से अपनी शादी के उचित खर्चों को पाने का कानूनी अधिकार है। अदालत ने कई फैसलों में यह साफ किया है कि एक पिता की जिम्मेदारी केवल बेटी की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी शादी का खर्च उठाना भी उसके भरण-पोषण (Maintenance) का ही एक हिस्सा माना जाता है।

यह अधिकार केवल उन बेटियों के लिए ज्यादा मजबूत होता है जिनके पास आय का कोई अपना साधन नहीं है। अगर बेटी बालिग है लेकिन बेरोजगार है या उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो वह कानूनी तौर पर पिता से शादी के खर्च की मांग कर सकती है। हालांकि, यदि बेटी अच्छी तरह से शिक्षित है, नौकरी कर रही है और अपना खर्च खुद उठाने में पूरी तरह सक्षम है, तो कोर्ट पिता को पैसे देने के लिए मजबूर करने में सख्ती कम कर सकता है।

भारतीय अदालतों ने यह भी माना है कि अगर पिता के पास पर्याप्त संपत्ति या आय है, तो वह अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। यदि पिता पैसे देने से मना करता है, तो बेटी पारिवारिक अदालत (Family Court) में भरण-पोषण के लिए याचिका दायर कर सकती है। इसमें कोर्ट पिता की आर्थिक स्थिति और बेटी की जरूरतों को देखते हुए एक उचित राशि तय करता है।

कानून यह भी कहता है कि शादी के खर्च का दावा केवल 'उचित' खर्चों के लिए ही किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि पिता की हैसियत के हिसाब से ही खर्च तय किया जाएगा। यह अधिकार केवल हिंदू परिवार ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों में भी अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के तहत सुरक्षा प्राप्त करता है।

141 votes

अगर बेटी बालिग है और कमाने में सक्षम है तो वह अपने पिता से पैसे नहीं मांग सकती है। यह पिता पर भी निर्भर करता है कि वह पैसा देना चाहता है या नहीं।

310 votes

मुझे लगता है कि भारत में कानून का कोई प्रावधान नहीं है जो बेटी को उसकी शादी के लिए पैसे का दावा करने का अधिकार बताता हो। बेटी शादी तक अपने पिता से भरण-पोषण का दावा कर सकती है। विवाह की व्यवस्था करना या अपनी बेटी का विवाह करना पिता का नैतिक कर्तव्य है, लेकिन भूमि के कानून द्वारा लागू दायित्व नहीं है।

122 votes

भारत में अपने पिता से संपत्ति का दावा करने के लिए एक बेटी को बेटे की तरह हर अधिकार है। अविवाहित पुत्री का भरण-पोषण करना अभी भी पिता का विशेषाधिकार है और उसके बाद पिता की मृत्यु हो जाने पर विवाहित पुत्री का संपत्ति पर अधिकार होता है जब तक कि संपत्ति वसीयत द्वारा किसी अन्य को उपहार या वसीयत में न दी गई हो।

205 votes

यह एक बहुत अच्छा प्रश्न है। बेटी की शादी की तारीख तक उसके पिता से भरण-पोषण का दावा करने का कानून का प्रावधान है, तो उसके पिता से उसकी शादी का पूरा खर्चा लेने का कानून का प्रावधान क्यों नहीं है, जब वह प्रेम-प्रसंग करती है और शादी करती है अपने पिता की सहमति के बिना या जब वह अपनी माँ के साथ अपने पिता से अलग रहती है और माँ शादी का खर्च उठाने में असमर्थ होती है। मेरा विचार है कि संसद का यह कर्तव्य है कि वह इस मामले को देखे और इस संबंध में तत्काल एक कानून बनाए। तब तक इंतजार करें....


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