क्या एक दिन वाली कोर्ट मैरिज में घर पर नोटिस भेजा जाता है
सवाल
उत्तर (2)
इसका सीधा जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप शादी का कौन सा तरीका चुनते हैं। जिसे आम भाषा में 'एक दिन वाली कोर्ट मैरिज' कहा जाता है, उसमें आमतौर पर घर पर कोई नोटिस (Notice) नहीं भेजा जाता है।
कानूनी रूप से कोर्ट मैरिज दो तरह की होती है:
-
विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act): यह असली कोर्ट मैरिज है। इसमें आपको 30 दिन पहले आवेदन देना होता है। नियम के अनुसार, कोर्ट आपके आवेदन का नोटिस अपने नोटिस बोर्ड पर लगाता है। हालांकि कानूनन घर पर नोटिस भेजना अनिवार्य नहीं है, लेकिन कई बार पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) के नाम पर पुलिस घर जा सकती है या नोटिस भेजा जा सकता है। इसलिए इसमें गोपनीयता (Privacy) का खतरा रहता है।
-
धार्मिक विवाह और पंजीकरण (Arya Samaj + Registration): जिसे वकील 'एक दिन की शादी' कहते हैं, वह वास्तव में यह प्रक्रिया है। इसमें पहले आप दोनों 'आर्य समाज मंदिर' में हिंदू रीति-रिवाज से शादी करते हैं। इसके बाद उस शादी को मैरिज रजिस्ट्रार के दफ्तर में 'हिंदू विवाह अधिनियम' (Hindu Marriage Act) के तहत पंजीकृत (Register) करवाया जाता है।
इस दूसरी प्रक्रिया (आर्य समाज और रजिस्ट्रेशन) में किसी भी प्रकार का 30 दिन का नोटिस देने की जरूरत नहीं होती और न ही घर पर कोई चिट्ठी भेजी जाती है। यह प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी हो जाती है और आपको उसी दिन मैरिज सर्टिफिकेट मिल जाता है।
फिर भी, सावधानी के तौर पर फॉर्म भरते समय अपना पता और फोन नंबर बहुत ध्यान से भरें। कई बार सरकारी सिस्टम से अपने आप एक बधाई संदेश (SMS) या पत्र जा सकता है। इसलिए एक अच्छे वकील की मदद लें जो यह सुनिश्चित करे कि कोई भी दस्तावेज आपके घर के पते पर पोस्ट न किया जाए।
कोर्ट मैरिज और नोटिस मैरिज में अंतर होता है। सबसे पहले कोर्ट मैरिज वह होती है जिसमें विवाह आर्य समाज मंदिर में होता है और पंजीकरण विवाह उपलब्ध दिन पर होता है। आमतौर पर शादी संबंधित क्षेत्र के एसडीएम द्वारा की जाती है जिसमें एसडीएम कार्यालय द्वारा दोनों पक्षों को संबोधित करने के लिए एक नोटिस जारी किया जाता है। 30 दिनों की अवधि के लिए प्रभाव पड़ता है और यदि एसडीएम को दोनों पक्षों के परिवार के सदस्यों से कोई आपत्ति नहीं मिलेगी, तो उस विवाह को एसडीएम के समक्ष किया जाता है, जिसे अदालत के नोटिस विवाह के रूप में जाना जाता है। इसलिए शादी से पहले कोई नोटिस नहीं भेजा जाता है।
अस्वीकरण: इस पृष्ठ का अनुवाद Google Translate की मदद से किया गया है। इसमें कुछ अंश या संपूर्ण अनुवादित लेख गलत हो सकता है क्योंकि सटीकता के लिए किसी वकील द्वारा इसकी जाँच नहीं की गई है। कोई भी व्यक्ति या संस्था जो इस अनुवादित जानकारी पर निर्भर है, वह ऐसा अपने जोखिम पर करता है। LawRato.com अनुवादित जानकारी की सटीकता, विश्वसनीयता, अस्पष्टता, चूक या समयबद्धता पर निर्भरता के कारण होने वाले किसी भी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अपने स्वयं के कानूनी मामले के लिए किसी भी निर्णय लेने के लिए अपने वकील से जांच और पुष्टि कर सुनिश्चित करें।
अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
परिवार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- Ji mera name hiralal hai or mujhe document problem hai main surat Sahar main raheta hu leki main janm Uttar Pradesh main hua hai or vaha par mera name nimar tha lekin surat ke sabhi document main Hiralal hai lekin kheti ke dastavej main nimar hai ise sahi kese karu or abhi sir fom bhi fara ja raha hai or main problem main hu ki kis main aapna name sahi karu sath main papa ka name main bhi problem hai main surat main hi hu or sabhi document main bhi hiralal kada hai liki kheti ka dastavej main nimar hai Please help me
- मेरी शादी को 4 साल हुए हैं मैं सनातनी भारतवासी हिंदू मैं दिल्ली से हूं और मेरी शादी हरियाणा सोनीपत जिले में हुई है शादी के बाद से और अब तक के अपमानित भरे शब्द गंदी गाली हाथापाई मारपीट करना ठीक प्रकार से खर्च ना उठाना अपने जिम्मेवारी को ना उठाना और मेरे दो छोटे बच्चे हैं जिनकी के जिम्मेदारी का एहसास है मुझे मैं तलाक भी नहीं लेना चाहती घर बसाना चाहती हूं इस चीज का क्या सॉल्यूशन होना चाहिए क्योंकि तलक कोई सॉल्यूशन नहीं है बच्चों को maa भी चाहिए और पिता भी चाहिए
- मेरी शादी को 4 साल हुए हैं दो बच्चे हैं मैं दिल्ली से हूं हरियाणा शादी हुई है मेरे पति ठीक प्रकार से खर्च भी नहीं देते मारपीट करना अपमानित भरे शब्द बोलना गंदी गाली देना हाथापाई करना गंदा बोलना इन्हीं दोनों चीजों से बहुत से बहुत परेशान हूं इसका क्या उपाय हो सकता है अपमानित भरे शब्द बोलते हैं ! मैं सनातनी हूं भारतवासी हो और हिंदू hu
- pati patni ka case suru hone se pahle mediation ke liye jata hai or agar patni court me hajir nahi hoti hai to xparti ko koi fayda hoga ya nahi. kya court patni se mediation me nahi aane ki vajah nahi puchhega