शराबी पति मारपीट करे और तलाक मांगे तो पत्नी को क्या करना चाहिए


सवाल

मेरी शादी को दो साल हो गए हैं और हम हिंदू रीति-रिवाज से विवाह बंधन में बंधे थे। मेरा पति चेन्नई में रहता है और उसे शराब की बहुत बुरी लत है। शराब पीकर वह मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करता है। अब वह अपनी कमियों को छिपाने के लिए मुझसे तलाक मांग रहा है और मेरे ससुराल वाले भी इस मामले में मेरी कोई मदद नहीं कर रहे। मैं जानना चाहती हूं कि इस घरेलू हिंसा और तलाक की धमकी से निपटने के लिए मुझे तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

उत्तर (3)


470 votes

यह एक बहुत ही तनावपूर्ण स्थिति है, लेकिन कानूनी तौर पर आपका पक्ष बहुत मजबूत है। सबसे पहले आप पति की तलाक की धमकियों से डरना बंद करें। भारतीय कानून में, 'मैं तुम्हें खुश नहीं रख सकता' जैसा बहाना तलाक का कोई वैध आधार नहीं है। उल्टा, उनका शराबी होना और शराब पीकर क्लेश करना 'क्रूरता' (Cruelty) की श्रेणी में आता है, जो आपके पक्ष में एक मजबूत सबूत है।

आपको अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए तुरंत ये तीन कानूनी कदम उठाने चाहिए:

1. पुलिस में लिखित शिकायत (Written Complaint): सबसे पहले आप अपने नजदीकी पुलिस थाने या 'महिला थाना' (Women's Cell) में जाकर एक लिखित शिकायत दें। इसमें स्पष्ट लिखें कि आपका पति शराब पीकर आपके साथ गाली-गलौज और मारपीट करता है। अभी भले ही आप एफआईआर (FIR) दर्ज न करवाएं, लेकिन पुलिस के पास आपकी शिकायत का रिकॉर्ड होना बहुत जरूरी है। यह भविष्य में सबूत के तौर पर काम आएगा कि प्रताड़ना लंबे समय से चल रही थी।

2. घरेलू हिंसा का केस (Domestic Violence Act): आपको तुरंत एक वकील के जरिए कोर्ट में 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' की धारा 12 के तहत केस दर्ज करवाना चाहिए। इस कानून के तहत आपको कोर्ट से तीन तरह की सुरक्षा मिलेगी:

  • संरक्षण आदेश (Protection Order): कोर्ट पति को शराब पीकर आपसे दूर रहने और मारपीट न करने का आदेश देगा।

  • निवास आदेश (Residence Order): पति आपको घर से बाहर नहीं निकाल सकता। आपको उसी घर में रहने का अधिकार मिलेगा।

  • आर्थिक राहत: कोर्ट पति को इलाज और घर खर्च देने का आदेश देगा।

3. अपने शहर से केस करने का अधिकार: चूंकि आप बैंगलोर से हैं, कानून आपको एक विशेष अधिकार देता है। अगर आप चेन्नई में सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं, तो आप अपने मायके (बैंगलोर) वापस जा सकती हैं। नई 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 144 (भरण-पोषण) और घरेलू हिंसा कानून के तहत, आप बैंगलोर की कोर्ट से ही पति के खिलाफ मुकदमा चला सकती हैं। इससे पति को हर तारीख पर चेन्नई से बैंगलोर आना पड़ेगा, जिससे उन पर समझौता करने या सुधरने का दबाव बनेगा।

फिलहाल, अगर आप शादी बचाना चाहती हैं, तो पुलिस के जरिए 'काउंसलिंग' (Counseling) की मांग करें। अगर वह नहीं सुधरते, तो कानून आपको पूरा हर्जाना और भरण-पोषण दिलवाएगा।

116 votes

प्रिय मुवक्किल मैं आपके मामले से गुजर चुका हूं, यह खतरे की स्थिति में नहीं है, यह दोनों परिवारों की प्रतिबद्धता के साथ आपके धैर्य और व्यवस्था को स्थापित करके है, ठीक है, मुझे नहीं पता कि वह कितनी बार आपसे तलाक देने के लिए कह रहा है, आप एक काम कर सकते हैं, आप अपनी मां के पास आएं फीस दिनों के लिए घर अपने पिता और मां को भी बता दें, तब शायद उन्हें अपने रवैये का एहसास हो।

124 votes

इस मामले में आप पुलिस स्टेशन जा सकती हैं और भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत अपने पति के खिलाफ शिकायत कर सकती हैं। यह भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498ए के तहत एक दंडनीय अपराध है, जिसमें तीन साल तक की कैद हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। आप धारा के तहत याचिका भी दायर कर सकते हैं। घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिलाओं की सुरक्षा के 9 और 14। अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है। एक वर्ष तक का कारावास और / या रुपये तक का जुर्माना। अपराध के लिए 20,000/- लगाया जा सकता है। व्यथित व्यक्ति को उपलब्ध राहतें हैं: - • वह अपने पति के घर में रह सकती है और उसके द्वारा बेदखल नहीं की जा सकती। • प्रतिवादी उसे बेदखल नहीं कर सकता है या उसके कब्जे में बाधा नहीं डाल सकता है या उसके कार्यस्थल में प्रवेश नहीं कर सकता है। • उसे मौखिक रूप से, टेलीफोन, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उसके साथ संचार करने से रोका जा सकता है। • उसे उसके मासिक भरण-पोषण और घरेलू हिंसा के कारण हुए किसी भी खर्च और नुकसान के लिए भुगतान करने के लिए कहा जा सकता है। • मानसिक यातना और भावनात्मक संकट के लिए मुआवजा और हर्जाना लगाया जा सकता है।


अस्वीकरण: इस पृष्ठ का अनुवाद Google Translate की मदद से किया गया है। इसमें कुछ अंश या संपूर्ण अनुवादित लेख गलत हो सकता है क्योंकि सटीकता के लिए किसी वकील द्वारा इसकी जाँच नहीं की गई है। कोई भी व्यक्ति या संस्था जो इस अनुवादित जानकारी पर निर्भर है, वह ऐसा अपने जोखिम पर करता है। LawRato.com अनुवादित जानकारी की सटीकता, विश्वसनीयता, अस्पष्टता, चूक या समयबद्धता पर निर्भरता के कारण होने वाले किसी भी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अपने स्वयं के कानूनी मामले के लिए किसी भी निर्णय लेने के लिए अपने वकील से जांच और पुष्टि कर सुनिश्चित करें।

अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


भारत के अनुभवी परिवार वकीलों से सलाह पाए


परिवार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न