मैं मामले को एक राज्य से दूसरे राज्य में कैसे स्थानांतरित कर सकता हूं
सवाल
उत्तर (1)
हाँ, आप इस स्थिति में कानूनी कदम उठा सकते हैं। जब भी किसी मामले को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर (Transfer) करना होता है, तो उसकी शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पास होती है। चूंकि आपने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है, तो अब आपको अदालत की अगली प्रक्रिया का पालन करना होगा।
अगर आपका दामाद समन (Summons) मिलने के बाद भी जानबूझकर कोर्ट में पेश नहीं हो रहा है, तो आपके वकील कोर्ट से अनुरोध कर सकते हैं कि मामले की सुनवाई उसकी गैर-मौजूदगी में ही आगे बढ़ाई जाए। इसे 'एकतरफा कार्यवाही' (Ex-parte proceedings) कहते हैं। अगर कोर्ट को लगता है कि उसे जानकारी मिल चुकी है और वह फिर भी नहीं आ रहा, तो कोर्ट आपकी बात सुनकर केस को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दे सकता है।
मुआवजे (Compensation) या खर्चे के बारे में आपको यह समझना होगा कि सुप्रीम कोर्ट केवल केस ट्रांसफर करने का फैसला करता है। मुआवजे, गुजारा भत्ता (Maintenance) या स्त्रीधन की वापसी के लिए आपकी बेटी को संबंधित जिला अदालत या फैमिली कोर्ट में अलग से केस फाइल करना होगा। एक पत्नी होने के नाते आपकी बेटी का पूरा हक है कि वह अपने पति से रहने और खाने-पीने का खर्चा मांगे।
मेरी सलाह है कि आपकी बेटी को दिल्ली के फैमिली कोर्ट में घरेलू हिंसा (Domestic Violence) या भरण-पोषण (Maintenance) का केस तुरंत दर्ज करना चाहिए। इससे दामाद पर कानूनी दबाव बढ़ेगा। चूंकि वह बैंगलोर में काम कर रही हैं, तो वह वहां से भी कानूनी कार्यवाही शुरू कर सकती हैं। पुलिस और कोर्ट के डर से अक्सर ऐसे लोग बातचीत के लिए तैयार हो जाते हैं।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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