बिना कोर्ट गए और पहचान छुपाकर की गई शादी की कानूनी सच्चाई क्या है


सवाल

स्नातक की पढ़ाई के दौरान मेरी एक सहेली को एक लड़के ने अपनी असली पहचान छुपाकर प्रेम जाल में फंसाया। उसने सहेली को प्यार साबित करने के नाम पर जबरदस्ती कुछ कागजों पर दस्तखत करवाए और उसकी जानकारी के बिना कुछ दस्तावेज भी ले लिए। अब वह लड़का दावा कर रहा है कि उनकी कोर्ट मैरिज हो चुकी है, जबकि मेरी सहेली कभी कोर्ट गई ही नहीं। क्या ऐसी शादी कानूनी रूप से वैध है और उसे इस धोखेबाज लड़के से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

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ऐसी शादी कानून की नजर में पूरी तरह से अवैध और फर्जी है। भारत में कोर्ट मैरिज (Court Marriage) के लिए लड़का और लड़की दोनों का रजिस्ट्रार के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है। अगर आपकी सहेली कभी कोर्ट गई ही नहीं और न ही उसने रजिस्ट्रार के सामने अपनी सहमति दी है, तो यह शादी पूरी तरह से धोखाधड़ी का मामला है। पहचान छुपाना और धोखे से दस्तखत करवाना अपने आप में एक गंभीर अपराध है।

आपकी सहेली को इस फर्जी शादी को खत्म करने के लिए फैमिली कोर्ट में शादी को अमान्य घोषित (Annulment of Marriage) करने की याचिका दायर करनी चाहिए। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12 के तहत, अगर शादी धोखे से या किसी महत्वपूर्ण तथ्य (जैसे पहचान या धर्म) को छुपाकर की गई है, तो कोर्ट उस शादी को शून्य घोषित कर सकता है। इससे आपकी सहेली का स्टेटस फिर से 'अविवाहित' हो जाएगा।

इसके साथ ही, उस लड़के के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उसने पहचान छुपाकर धोखाधड़ी की है और फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं, जो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दंडनीय अपराध है। अगर वह सहेली को डरा-धमका रहा है, तो पुलिस उसे सुरक्षा भी प्रदान कर सकती है। उसे उस लड़के से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि कानून उसके साथ है।

मेरी सलाह है कि सबसे पहले उस कथित मैरिज सर्टिफिकेट की एक कॉपी हासिल करें और किसी अच्छे वकील के जरिए पुलिस और कोर्ट दोनों जगह कार्यवाही शुरू करें। जितनी जल्दी आप कानूनी कदम उठाएंगी, उतनी ही मजबूती से इस फर्जीवाड़े को खत्म किया जा सकेगा।


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