पत्नी को मायके से बुलाने के कानूनी उपाय क्या है


सवाल

मेरी पत्नी 6 महीने से अपने मायके में रह रही है। मैं उसे लेने जाता हूं, लेकिन उसके घरवाले मुझे रोकते हैं और मना कर देते हैं। उसके जीजाजी कहते हैं कि उन्होंने शादी में पैसा लगाया है, इसलिए वो मेरे यहां तभी आएगी जब उनकी मर्जी होगी। वो मेरे यहां से अपने पिता को देखने गई थी, लेकिन अब वो अपने जीजाजी के घर पहुंच गई है। अब वो मुझसे कहती है कि अपनी जॉब के लिए मुझे उसके साथ ले चलो और मेरे मां-पिता को छोड़ दो। सास-ससुर कहते हैं कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए। आप बताइए मुझे क्या करना चाहिए। पत्नी मायके से ना आए तो क्या करें? कानूनी उपाय और शादी बचाने के रास्ते क्या हैं?

LawRato

उत्तर (4)


114 votes

सबसे आसान और सही रास्ता है हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत फैमिली कोर्ट में केस डालना। इसे वैवाहिक अधिकारों की बहाली कहते हैं। इसका मतलब है कि आप कोर्ट से कह सकते हैं कि आपकी पत्नी को आपके साथ रहना चाहिए, क्योंकि शादी के बाद ये आपका हक है। ये तरीका खास तौर पर शादी को बचाने के लिए बना है। कोर्ट आपकी पत्नी को नोटिस भेजेगा और मामले को सुनेगा।

अगर आपको लगता है कि उसकी मर्जी के खिलाफ उसे मायके में या जीजाजी के पास रोका जा रहा है, और वो आपके साथ आना चाहती है, तो आप हाई कोर्ट में रिट याचिका भी डाल सकते हैं। ये तब काम आता है जब कोई जबरदस्ती की बात हो। लेकिन अगर वो खुद नहीं आना चाहती और कोई दूसरी शर्त रख रही है - जैसे जॉब या सास-ससुर की कोई बात, तो कोर्ट में ये सारी बातें साफ करनी होंगी।

245 votes

यदि आप कानूनी रूप से हिंदू है तो आप हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अधीन अपनी पत्नी को वापस बुला कर वैवाहिक संबंधों की पुनः स्थापना का वाद दायर कर सकते है, वहीं न्यायालय आपकी उस समस्या का भी समाधान करने मैं सक्षम होगा कि आपकी पत्नी आपके माता-पिता के साथ क्यों नहीं रहना चाहती है।

248 votes

विवाह दो पक्षों का मेल है यह सही है, लेकिन इसमें एक अधिकार की कभी बात ही नहीं की जाती है, वह है वैवाहिक अधिकार की बहाली। हिंदू विवाह कानून में विवाह अधिकारों की बहाली का उल्लेख धारा 9 में किया गया है। यह शादी को बचाने के लिए रहता है। यह अधिकार विशुद्ध रूप से पति-पत्नी के बीच रहता है।  
वैवाहिक अधिकारों की बहाली को ऐसे समझ सकते हैं- भले ही पति या पत्नी दोनों बिना किसी कारण के एक-दूसरे से अलग रहते हैं या दोनों में से कोई दूसरे को छोड़कर चला जाता है तो छोड़कर जाने वाले के विरुद्ध ‘वैवाहिक संबंधों की वापसी’ के लिए मुकदमा दायर किया जा सकता है।
धारा 9 का सामाजिक और कानूनी पक्ष भी यह है कि किसी भी तरह से दोनों पक्षों को अलग होने से बचाया जा सके। वैवाहिक अधिकारों में प्रेम और भावनात्मक लगाव एक अहम पक्ष है और यह धारा उसे परिपूर्ण करने में पूरी मदद करती है।


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