पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है


सवाल

मेरे पति मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। मैं घरेलू हिंसा का केस दर्ज करना चाहती हूँ और गुजारा भत्ता (maintenance) का दावा करना चाहती हूँ। क्या मुझे एफआईआर दर्ज कराना जरुरी है? घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर (1)


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नहीं, एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। घरेलू हिंसा का केस और पति के खिलाफ एफआईआर दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। यदि आप सिर्फ घरेलू हिंसा का मामला और गुजारा भत्ता (maintenance) का दावा करना चाहती हैं, तो इसके लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में आवेदन कर सकती हैं। अगर पति द्वारा आपसे मारपीट या हिंसा की जा रही है और आप उसे सजा दिलवाना चाहती हैं, तो एफआईआर दर्ज कराना जरूरी हो सकता है।

पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया:

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत केस दर्ज करें:

  • आप घरेलू हिंसा से सुरक्षा (Protection Order), रहने का अधिकार (Right to Residence), मुआवजा (Compensation), और गुजारा भत्ता (Monetary Relief) की मांग कर सकती हैं।
  • आप घरेलू हिंसा की शिकायत मजिस्ट्रेट कोर्ट में, महिला हेल्पलाइन, पुलिस, या एनजीओ के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।
  • मजिस्ट्रेट शिकायत मिलने के 3 दिनों के अंदर सुनवाई शुरू करेगा और 60 दिनों के भीतर केस निपटाने की कोशिश करेगा।

गुजारा भत्ता (Maintenance) के लिए आवेदन करें:

आप CrPC की धारा 125 के तहत अपने और अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता (maintenance) की मांग कर सकती हैं। अदालत पति की आय और आपके खर्चों को देखकर मासिक भत्ता तय करेगी।

यदि आपके साथ शारीरिक हिंसा हुई है, तो BNS के तहत FIR दर्ज कराएं:

  • अगर पति मारपीट, धमकी, दहेज प्रताड़ना, या मानसिक उत्पीड़न कर रहा है, तो आप BNS की धारा 85, 115 और सेक्शन 351 के तहत FIR दर्ज करा सकती हैं।
  • FIR दर्ज कराने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन जाएं या महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर कॉल करें।
  • अगर पुलिस शिकायत दर्ज नहीं करती, तो आप मजिस्ट्रेट के पास CrPC की धारा 156(3) के तहत शिकायत कर सकती हैं।

पति के खिलाफ इस केस में आपको कोर्ट से क्या-क्या मिल सकता है?

  • संरक्षण आदेश (protection order): पति को पत्नी और उसके परिवार से दूर रहने का निर्देश।
  • रखरखाव (maintenance): पति को हर महीने आपको पैसे देने का आदेश मिलेगा, ताकि आपकी जरूरतें पूरी हों।
  • निवास आदेश (residence order): अगर पति आपको घर से निकालना चाहे, तो कोर्ट उसे रोक सकता है। आप पति के घर में रह सकती हैं।
  • बच्चों की कस्टडी (child custody): अगर बच्चे हैं, तो कोर्ट बच्चो की कस्टडी आपको दे सकता है।

यदि आप सीधे मामला दर्ज नहीं कराना चाहती हैं, तो राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), महिला हेल्पलाइन 1091 जैसे कई NGO आपकी मदद कर सकते हैं। अपनी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को लेकर तुरंत एक अनुभवी वकील से सलाह लें।


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