तलाक के लिए प्रक्रिया और आधार अगर पति-पत्नी एक साथ नहीं रहते हो
सवाल
उत्तर (1)
विवादास्पद तलाक के मामले में, तलाक की याचिका दायर करने से पहले कुछ निश्चित आधार को पूरा करना आवश्यक है। तलाक के लिए आधार नीचे वर्णित है, हालांकि सभी भारत में सभी धर्मों पर लागू नहीं हैं।
क्रूरता - किसी भी तरह की मानसिक और शारीरिक चोट जो जीवन, अंग और स्वास्थ्य के खतरे का कारण बन जाए, से विवश हो कर एक पति या पत्नी एक तलाक का मामला दर्ज कर सकता है। मानसिक यातनाओं के माध्यम से क्रूरता का अमूर्त कार्य के केवल एक कार्य से नहीं बल्कि घटनाओं की श्रृंखला से तय होता है। लेकिन कुछ उदाहरण हैं जैसे भोजन से वंचित किया जा रहा है, दहेज लेने के लिए निरंतर ग़लत बर्ताव और दुर्व्यवहार, विकृत यौन कृत्य आदि क्रूरता के अंतर्गत शामिल हैं।
व्यभिचार - विवाह के बाहर संभोग सहित किसी भी प्रकार के यौन संबंधों में शामिल होने का कार्य व्यभिचार कहा जाता है। व्यभिचार एक आपराधिक अपराध के रूप में गिना जाता है और इसे स्थापित करने के लिए पर्याप्त सबूत आवश्यक हैं। 1976 में कानून के एक संशोधन में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को तलाक लेने के लिए व्यभिचार का एक ही कार्य पर्याप्त है।
परित्याग - यदि पति / पत्नी में से एक साथी दूसरे को कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए छोड़ जाता है, तो छोड़ दिया पति / पत्नी को परित्याग के आधार पर तलाक का मामले दर्ज कर सकता है।
मानसिक विकार - मानसिक विकार तलाक दाखिल करने के लिए एक आधार बन सकता है अगर याचिकाकर्ता का साथी (पति / पत्नी) असाध्य मानसिक विकार और पागलपन से पीड़ित है और इसलिए इस जोड़े से एक साथ रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
यौन रोग - अगर एक साथी (पति / पत्नी) एक गंभीर संक्रामक बीमारी से पीड़ित है, तो दूसरे साथी (पति / पत्नी) द्वारा तलाक दायर किया जा सकता है। यौन संचारित रोग जैसे एड्स को यौनरोग कहा जाता है।
मृत्यु का अनुमान - यदि किसी व्यक्ति को सात साल की निरंतर अवधि के लिए किन्ही व्यक्तियों द्वारा जिन्हे उस व्यक्ति को 'स्वाभाविक रूप से' सुनाई या देखे जाने की उम्मीद की जाती है, उसे जीवित देखा या सुना नहीं जाता है, तो व्यक्ति को मृत माना जाता है। यदि दूसरा साथी ((पति / पत्नी) पुनर्विवाह में रुचि रखता है तो उसे तलाक दर्ज करना होगा।
धर्म परिवर्तन - यदि दोनों में से कोई एक साथी खुद को दूसरे धर्म में परिवर्तित कर लेता है, तो दूसरा साथी इस आधार पर तलाक का मामला दर्ज कर सकता हैं।
सांसारिक त्याग - यदि एक साथी (पति / पत्नी) कोई अन्य धर्म आदेश को ग्रहण करके सभी सांसारिक कार्यों को त्याग देता है, तो दूसरा साथी (पति / पत्नी) तलाक दायर करने का हकदार है।
वैवाहिक अधिकारों की बहाली के हुक्मनामे का गैर-अनुपालन
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत किसी भी पार्टी को अदालती डिक्री पारित होने के बाद भी जोड़े के बीच कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए वैवाहिक अधिकारों की बहाली नहीं होने के आधार पर तलाक के लिए याचिका पेश करने का अधिकार है। वैवाहिक अधिकारों का पुनर्वास एक ऐसी प्रक्रिया है जहां अदालत विवाहित जोड़े को आखिरी बार तलाक लेने से पहले उनकी शादी को बहाल और पुनर्स्थापित करने का निर्देश देती है। मूल उद्देश्य पति और पत्नी के बीच समझौते और सहवास की संभावना का पता लगाना है। कानून यह व्यवस्था प्रदान करता है कि जब किसी एक साथी की दूसरे के समाज से वापसी हो जाती हैं, तो दूसरी पार्टी अदालत से उसके साथ रहने के लिए निर्देश देने की माँग कर सकती है।
न्यायिक विवाह-विच्छेद के हुक्मनामे का गैर-अनुपालन
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत किसी भी पार्टी को न्यायिक विवाह-विच्छेद के हुक्मनामे के बाद दंपती के बीच कम से कम एक वर्ष के समय के लिए किसी भी तरह से पुनर्वास नहीं होने के आधार पर तलाक के लिए याचिका पेश करने का अधिकार है।
सहवास का पुनरारंभ तब होता है जब एक विवाहित रिश्ते में पति-पत्नी एक साथ रह रहे हो। इस अभिव्यक्ति का अर्थ पार्टियों के इरादे पर निर्भर करता है, और पति-पत्नी के वैवाहिक घर में नहीं रहते हुए भी सहवास का पुनरारंभ हो सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सहवास की बहाली के लिए पति-पत्नी के बीच संभोग एक अच्छा आधार है, हालांकि, यह केवल 'निर्णायक सबूत' नहीं है। संभोग के बिना भी सहवास की बहाली हो सकती है।
बलात्कार, पुस्र्षमैथुन या पशुसंभोग
इस प्रावधान के तहत, तलाक की याचिका दायर की जा सकती है यदि शादी के बाद पति, बलात्कार, पुस्र्षमैथुन या पशुसंभोग के दोषी हो।
अधिनियम पूर्व बहुविवाही शादी
प्रावधान के अनुसार, यदि अधिनियम की शुरुआत से पहले पति की एक अन्य पत्नी है और दूसरे विवाह के समय जीवित है तो तलाक के लिए यह एक वैध आधार है। यह आधार तभी उपलब्ध है जब दोनों विवाह वैध हैं और दूसरी पत्नी तलाक की याचिका दायर करने के समय मौजूद है। हालांकि, आज इस आधार का व्यावहारिक महत्व नहीं है।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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