घरेलू हिंसा के लिए पति के खिलाफ शिकायत करने की प्रक्रिया


सवाल

मेरे पति ने घरेलू हिंसा की, जिसमें मुझे चोट भी लगी। पति द्वारा की गई मारपीट के खिलाफ शिकायत करने की प्रक्रिया क्या है? भारत में ऐसी हिंसा की सजा क्या है, और मुझे आगे क्या करना चाहिए?"

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देखिए, घरेलू हिंसा का सामना करना बेहद तकलीफदेह होता है, खासकर जब आपको चोट भी लगी हो। मैं समझता हूँ कि आप डरी हुई होंगी, लेकिन भारत में इसके खिलाफ मजबूत कानून हैं। आप अपने हक के लिए आवाज उठा सकती हैं, और मैं आपको बताऊंगा कि यह कैसे करना है।
 

घरेलू हिंसा की शिकायत करने की प्रक्रिया क्या है?

सबसे पहले, आपको नजदीकी पुलिस स्टेशन जाना चाहिए। वहाँ महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act) के तहत अपनी शिकायत दर्ज करवानी होगी। आप पुलिस को सारी बात बताएं - कब, कैसे, और क्या हुआ। अगर आपको शारीरिक चोट लगी है, तो तुरंत अस्पताल जाएँ और मेडिकल रिपोर्ट (medical report) बनवाएँ। यह रिपोर्ट आपके केस का सबसे बड़ा सबूत होगी।

पुलिस के अलावा, आप संरक्षण अधिकारी (protection officer) से भी संपर्क कर सकती हैं। ये अधिकारी सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं और घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद के लिए होते हैं। अगर आपको पुलिस स्टेशन जाने में डर लगता है, तो संरक्षण अधिकारी आपको सहारा दे सकते हैं। आप चाहें तो सीधे कोर्ट में भी जा सकती हैं और मजिस्ट्रेट के सामने पति के खिलाफ कंप्लेंट दर्ज करें।

शिकायत के बाद, आप कई तरह की राहत मांग सकती हैं। संरक्षण आदेश (protection order) ले सकती हैं, ताकि पति आपको फिर से नुकसान न पहुँचाए। अगर आपको घर से निकाला गया है, तो निवास आदेश (residence order) मांग सकती हैं, जिससे आप घर में रह सकें। इसके अलावा, मुआवजा (compensation) या आर्थिक राहत (monetary relief) भी मांग सकती हैं, जो चोट या नुकसान की भरपाई करेगा। वकील की सलाह से ये सारी चीजें सही ढंग से कोर्ट में पेश करें।

अगर आपके साथ गंभीर हिंसा हुई है -  मारपीट से गहरी चोट या लैंगिक हिंसा (sexual violence) हुआ है तो आप भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत भी आपराधिक केस दायर कर सकती हैं। इसके लिए बीएनएस धारा 85 लागू हो सकती है, जो पति या ससुराल वालों की क्रूरता को कवर करती है। वकील आपको बताएगा कि आपकी स्थिति में कौन-सा कानून सबसे सही रहेगा।
 

भारत में घरेलू हिंसा की सजा क्या है?

महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अगर पति दोषी पाया जाता है, तो उसे 1 साल तक की जेल और 20,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। लेकिन अगर चोट गंभीर है या BNS के तहत केस चला - जैसे धारा 115 (चोट पहुँचाना) या धारा 117 (गंभीर चोट पहुँचाना) लगी हैतो सजा 3 साल तक की जेल या उससे ज्यादा भी हो सकती है, साथ में जुर्माना। सजा इस बात पर निर्भर करती है कि हिंसा कितनी गंभीर थी और सबूत कितने मजबूत हैं।
 

शिकायत दर्ज कराने के बाद आगे क्या करना चाहिए?

सबसे जरूरी है कि आप जल्दी कदम उठाएँ। पुलिस में शिकायत के बाद, एक अच्छा वकील चुनें जो घरेलू हिंसा के मामलों में अनुभवी हो। वह आपकी शिकायत को मजबूत बनाएगा, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों को जोड़ेगा, और कोर्ट में आपका पक्ष रखेगा। अगर आपके बच्चे हैं, तो उनकी कस्टडी (custody) के लिए भी बात करें।


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