बिना तलाक पति से अलग रहने के कानूनी नियम और प्रक्रिया


सवाल

मेरी शादी को अभी दस महीने ही हुए हैं और विचारों में मतभेद होने के कारण मैं अपने पति से तलाक लेकर आगे बढ़ना चाहती हूं। मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या मैं कानूनी तौर पर तलाक लिए बिना अपने पति से अलग रह सकती हूं और अगर मैं ऐसा करती हूं तो क्या वह मेरे खिलाफ कोई पुलिस केस या कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं?

उत्तर (1)


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जी हां, आप तलाक लिए बिना भी अपने पति से अलग रह सकती हैं। भारतीय कानून में अलग रहने के लिए तलाक होना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, शादी के एक साल पूरे होने से पहले तलाक की अर्जी (Petition) दायर करना मुश्किल होता है, जब तक कि मामला बहुत गंभीर न हो।

अगर आप बिना तलाक के अलग रहती हैं, तो यह कोई अपराध नहीं है। लेकिन, आपके पति हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 9 के तहत 'दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना' (Restitution of Conjugal Rights) के लिए पारिवारिक न्यायालय (Family Court) में अर्जी दे सकते हैं। इसका मतलब है कि वह कोर्ट के जरिए आपको वापस बुलाने की कोशिश कर सकते हैं।

अगर कोर्ट को लगता है कि आपके पास अलग रहने का कोई वाजिब कारण नहीं है, तो वह आपको वापस जाने का आदेश दे सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि कोर्ट का आदेश होने के बावजूद, कोई भी कानून आपको शारीरिक रूप से जबरदस्ती साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर आप उस आदेश का पालन नहीं करती हैं, तो यह बाद में तलाक का आधार बन सकता है।

चूंकि आपकी शादी को अभी सिर्फ 10 महीने हुए हैं, आमतौर पर आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) के लिए भी एक साल का इंतजार करना पड़ता है। इस बीच आप चाहें तो 'न्यायिक अलगाव' (Judicial Separation) के लिए अर्जी दे सकती हैं। यह तलाक से एक कदम पहले की प्रक्रिया है जिसमें आप कानूनी तौर पर अलग रहती हैं और इससे आपको भविष्य में तलाक लेने में भी मजबूती मिलेगी।


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