तलाक का केस गाजियाबाद से दिल्ली कैसे ट्रांसफर करवाएं
सवाल
उत्तर (2)
जी हां, आप अपने तलाक के मुकदमे को गाजियाबाद से दिल्ली ट्रांसफर करवा सकती हैं और आपके पास इसके लिए बहुत मजबूत आधार मौजूद हैं। चूंकि गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) और दिल्ली दो अलग-अलग राज्य हैं, इसलिए यह मामला उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके लिए आपको सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत यानी 'सर्वोच्च न्यायालय' (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाना होगा।
कानूनी प्रक्रिया के तहत, आपको 'सिविल प्रक्रिया संहिता' (Code of Civil Procedure) की धारा 25 के तहत सुप्रीम कोर्ट में एक 'स्थानांतरण याचिका' (Transfer Petition) दायर करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर ऐसे मामलों में पत्नी की सुविधा को प्राथमिकता देता है, खासकर तब जब उसके पास छोटा बच्चा हो और पति के खिलाफ अन्य मुकदमे (जैसे 498A या गुजारा भत्ता) पहले से ही पत्नी के शहर में चल रहे हों।
कोर्ट यह मानता है कि एक ही समय पर दो अलग-अलग शहरों में मुकदमा लड़ना महिला के लिए कठिन और खर्चीला है। इसलिए, कोर्ट सारे केस एक ही जगह (दिल्ली) चलाने का आदेश दे सकता है ताकि समय और पैसे की बर्बादी न हो।
जहां तक खर्चे का सवाल है, सुप्रीम कोर्ट की सरकारी फीस बहुत मामूली होती है। असली खर्चा वकील की फीस का होता है, जो हर वकील के अनुभव के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। अगर आप निजी वकील का खर्च नहीं उठा सकतीं, तो आप 'सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति' (Supreme Court Legal Services Committee) से संपर्क कर सकती हैं, जहां आपको मुफ्त में वकील मिल सकता है।
आप निश्चित रूप से अपने मामले को स्थानांतरित कर सकते हैं। केवल सर्वोच्च न्यायालय के पास अधिकार क्षेत्र है। सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल करने के लिए एक स्थानांतरण याचिका आवश्यक है। हालाँकि, मामलों की पेंडेंसी के दौरान आपने निपटारे की संभावना को नकार दिया है। जब तक दोनों पक्ष आम जमीन पर नहीं आते हैं, तब तक मामलों का पालन करना और स्थानांतरण याचिका दायर करना सुविधाजनक है। उसी के लिए खर्च नाममात्र होगा।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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