धारा 65 - भारतीय साक्ष्य अधिनियम in Hindi (Section 65 of Indian Evidence Act)


विवरण

65. अवस्थाएं जिनमें दस्तवेजों के सम्बन्ध में द्वितीयक साक्ष्य दिया जा सकेगा - किसी दस्तावेज के अस्तित्व, दशा या अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य निम्नलिखित अवस्थाओं में दिया जा सकेगा-(क) जबकि यह दर्शित कर दिया जाए या प्रतीत होता हो कि मूल ऐसे व्यक्ति के कब्जे में या शक्त्यधीन है- जिसके विरुद्ध उस दस्तावेज को साबित किया जाना ईप्सित है, अथवाजो न्यायालय की आदेशिका की पहुंच के बाहर है, या ऐसी आदेशिका के अध्यधीन नहीं है, अथवाजो उसे पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध है,और जबकि ऐसा व्यक्ति धारा 66 में वर्णित सूचना के पश्चात् उसे पेश नहीं करता है, ?(ख) जबकि मूल के अस्तित्व, दशा या अन्तर्वस्तु को उस व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध उसे साबित किया जाना है या उसके हित प्रतिनिधि द्वारा लिखित रूप में स्वीकृत किया जाना साबित कर दिया गया है;(ग) जबकि मूल नष्ट हो गया है, या खो गया, अथवा जबकि उसकी अन्तर्वस्तु का साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाला पक्षकार अपने स्वयं के व्यतिवम या उपेक्षा से अनुभूत अन्य किसी कारण से उसे युक्तियुक्त समय में पेश नहीं कर सकता;(घ) जबकि मूल इस प्रकृति का है कि उसे आसानही से स्थानान्तरित नहीं किया जा सकता;(ङ) जबकि मूल धारा 74 के अर्थ के अन्तर्गत एक लोक-दस्तावेज है;(च) जबकि मूल ऐसी दस्तावेज है जिसकी प्रमाणित प्रति का साक्ष्य में दिया जाना इस अधिनियम द्वारा या भारत में प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अनुज्ञात है;(छ) जबकि मूल ऐसे अनेक लेखाओं या अन्य दस्तावेजों से गठित है जिनकी न्यायालय में सुविधापूर्वक परीक्षा नहीं की जा सकती और वह तथ्य जिसे साबित किया जाना है सम्पूर्ण संग्रह का साधारण परिणाम है।अवस्थाओं (क), (ग) और (घ) में दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु का कोई भी द्वितीयक साक्ष्य ग्राह्य है।अवस्था (ख) में वह लिखित स्वीकृति ग्राह्य है।अवस्था (ड़) या (च) में दस्तावेज की प्रमाणित प्रति ग्राह्य है, किन्तु ऐसे किसी भी प्रकार का द्वितीयक साक्ष्य ग्राह्य नहीं है।अवस्था (छ) में दस्तावेजों के साधारण परिणाम का साक्ष्य ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा दिया जा सकेगा जिसने उनकी परीक्षा की है और जा ऐसी दस्तावेजों की परीक्षा करने में कुशल है।
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1(65-क, इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख से सम्बन्धित साक्ष्य के बारे में विशेष उपबंध- इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख की अन्तर्वस्तु धारा 65 ख के उपबंधों के अनुसार साबित की जा सकेगी।)
65ख, इलैक्ट्राॅनिक अभिलेखों की ग्राह्यता-
(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी:- किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख में अंतर्विष्ट किसी सूचना को भी, जो कम्प्यूटर द्वारा उत्पादित और किसी कागज पर मुद्रित, प्रकाशीय या चुंबकीय मीडिया में भंडारित, अभिलिखित या जकल की गई हो (जिसे इनमें इसके पश्चात् कम्प्यूटर निर्गम कहा गया है), तब एक दस्तावेज समझा जाएगा, यदि प्रश्नगत सूचना और कम्प्यूटर के संबंध मे, इस धारा में अल्लिखित शर्तें पूरी कर दि जाती हैं और वह मूल की किसी अंतर्वस्तु या उसमें कथित किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में, जिसका प्रत्यक्ष साक्ष्य ग्राह्य होता, अतिरिक्त सबूत या मूल को पेश किए बिना ही किन्हीं कार्यवाहियों में ग्राह्य होगा।
(2) कम्प्यूटर निर्गम की बचत बाबत उपधारा:-
(1) में वर्णित शर्तें निम्नलिखित होंगी, अर्थात-(क) सूचना के युक्त कम्प्यूटर निर्गम, कम्प्यूटर द्वारा उस अवधि के दौरान उत्पादित किया गया था जिसमें उस व्यक्ति द्वारा, जिसका कम्प्यूटर के उपयोग पर विधिपूर्ण नियंत्रण था, उस अवधि में नियमित रूप से किए गए किसी क्रियाकलाप के प्रयोजन के लिए, सूचना भंडारित करने या प्रसंस्करण करने के लिए नियमित रूप से कम्प्यूटर का उपयोग किया गया था;(ख) उक्त अवधि के दौरान, इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख में अन्तर्विष्ट किस्म की सूचना या उस किस्म की जिससे इस प्रकार अन्तर्विष्ट सूचना व्युत्पन्न प्राप्त की जाती है, उक्त क्रियाकलापों के सामान्य अनुक्रम में कम्प्यूटर में नियमित रूप से भरी गई थी;(ग) उक्त अवधि के महत्वपूर्ण भाग में आद्योपांत, कम्प्यूटर समूचित रूप से कार्य कर रहा था अथवा, यदि नही ंतो, उस अवधि के उस भाग की बाबत, जिसमें कम्प्यूटर समूचित रूप से कार्य नहीं कर रहा था या वह उस अवधि में प्रचालन में नहीं था, ऐसी अवधि नहीं थी जिसमें इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख या उसकी अंतर्वस्तु की शुद्धता प्रभावित होती हो; और(घ) इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख में अन्तर्विष्ट सूचना ऐसी सूचना से पुनः उत्पादित या व्युत्पन्न की जाती है, जिसे उक्त क्रियाकलापों से सामान्य अनुक्रम में कम्प्यूटर में भरा गया था।
(3) जहाँ किसी अवधि में:- उपधारा (2) के खण्ड (क) में यथा उल्लिखित, उस अवधि के दौरान नियमित रूप से किए गए किन्हीं क्रियाकलापों के प्रयोजनों के लिए सूचना के भंडारण या प्रसंस्करण का कार्य कम्प्यूटरों द्वारा नियमित रूप से निष्पादित किया गया था, चाहे वह-(क) उस अवधि में कम्प्यूटरों के प्रचालन के संयाजन द्वारा, या(ख) उस अवधि में उत्तरोत्तर प्रचालित विभिन्न कम्प्यूटरों द्वारा, या(ग) उस अवधि में उत्तरोत्तर प्रचलित कम्प्यूटरों के विभिन्न संयोजनों द्वारा, या(घ) उस अवधि में उत्तरोत्तर प्रचालन को अंतर्वलित करते हुए किसी अन्य रीति में हो, चाहे वह एक या अधिक कम्प्यूटरों और एक या अधिक कम्प्यूटरों के संयोजनों द्वारा किसी भी क्रम में हो, डस अवधि के दौरान उस प्रयोजन के लिए उपयोग किए सभी कम्प्यूटर इस धारा के प्रयोजनों के लिए एकल कम्प्यूटर के रूप में माने जाएंगे और इस धारा में कम्प्यूटर के प्रति निर्देश का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा।
(4) किन्हीं कार्यवाहियों में:- जहां इस धारा के आधार पर साक्ष्य में विवरण दिया जाना वांछित है, निम्नलिचिात बातों में से किसी बात को पूरा करते हुए प्रमाण पत्र, अर्थात-(क) विवरण से युक्त इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख की पहचान करना और उस रीति का वर्णन करना जिससे इसका उत्पादन किया गया था;(ख) उस इलैक्ट्राॅनिक अभिलेख के उत्पादन में अन्तर्वलित किसी युक्ति को ऐसी विशिष्टियां देना, जो यह दर्शित करने के प्रयाजन के लिए समुचित हों कि इलैक्ट्राॅनिक अभिलेचा का कम्प्यूटर द्वारा उत्पादन किया गया था;(ग) ऐसे विषयों में से किसी पर र्कावाई करना, जिससे उपधारा (2) में उल्लिखित शर्तें संबंधित है, और किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के लिए तात्पर्यित होना, जो सुसंगत युक्ति के प्रचालन या सुसंगत क्रियाकलाप के प्रबंध के (जो भी समुचित हों) संबंध में उत्तरदायी पदीय हैसियत में हो, प्रमाणपत्र में कथित किसी विषय का साक्ष्य होगा; और इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए किसी ऐसे विषय के लिए यह कथन पर्याप्त होगा कि यह कािन करने वाले व्यक्ति के सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास आधारा पर कहा गया है।
(5) इस धाारा के प्रयोजनों के लिए:-(क) सूचना किसी कम्प्यूटर को प्रदाय की गई समझी जाएगी यदि यह किसी समूचित रूप में प्रदाय की गई है, चाहे इस प्रकार किया गया प्रदाय सीधे (मानव मध्यक्षेप सहित या रहित) या किसी समुचित उपस्कर के माध्यम द्वारा किया गया हो;(ख) चाहे किस पदधारी द्वारा किए गए क्रियाकलापों के अनुक्रम में सूचना इसके भंडारित या प्रसंस्कृत किए जाने की दृष्टि से उक्त क्रियाकलापों के अनुक्रम से अन्यथा प्रचालित कम्प्यूटर द्वारा उक्त क्रियाकलापों के प्रयोजनों के लिए प्रदाय की जाती है, वह सूचना, यदि सम्यक् रूप से उस कम्प्यूटर को प्रदाय की जाती है तो, उन क्रियाकलापों के अनुक्रम में प्रदाय की गई समझी जाएगी;(ग) कम्प्यूटर उत्पाद को कम्प्यूटर द्वारा उत्पादित समझा जाएगा, चाहे यह इसके सीधे उत्पादित हो (मानव मध्यक्षेत सहित या रहित) या किसी समुचित उपस्कर के माध्यम से हो।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए, अनरू सूचना से व्युत्पन्न की गई सुूचना के प्रति कोई निर्देश, परिकलन, तुलना या किसी अन्य प्रक्रिया द्वारा उससे व्युत्पन्न के प्रति निर्देश होगा।



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