सर् आईपीसी धारा 02 अंतर्गत हत्या आजीवन


सवाल

सर् आईपीसी की धारा 302 के अंतर्गत हत्या के लिए आजीवन कारावास या मृत्यु दंड दिया जाता है , या राज्य सरकार द्वारा लघुकरण करके 14/20 साल के कारावास से दंडित किया जाता है जबकि मेरे यहां एक अपराधी जो धारा 302 का अपराधि था वह 2 साल में ही बाहर आ गया बो कैसे।

उत्तर (2)


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यह इसलिए क्यू कोर्ट से जामीन मंजूर हुआ होगा . कुछ शर्तों पर उसे कोर्ट ने जमीन पर रिहा किया है. जब केस की सुनवाई कोर्ट में चलने लगेगी तब उसे हाजिर होना है . जामिन लागू होते समय जो भी कंडीशन , जो भी शर्तें रखि...उसे पूरा पूरा पूरा करना है यदि वह कोई शर्त पूरी करने में कसूरवार होता है तब उसे वापस पुलिस जेल में डाल सकती है ,या रेगुलर तारीख में कोर्ट की तारीख में हाजिर नहीं होता है , तो भी उसे पुलिस जेल में रख सकती है या कोर्ट में तारीख को ना आने पर उसके खिलाफ वारंट भी निकल सकता है , वारंट के बाद भी यदि वह कोर्ट में हजर नहीं होता है तब ऐसे मामलों में कोर्ट उसके खिलाफ प्रोक्लेमेशन निकलकर अटक वारंट, पकड़ वारंट निकाल सकती है .इसका मतलब यह नहीं की 302 होने के बावजूद भी वह बाहर है . बिल्कुल नहीं उसने थोड़ा भी क्राइम किया तो पुलिस उसे जेल में वापस डाल सकती है , उसके खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई भी कंप्लेंट यदि पुलिस स्टेशन में आ जाता है तो यह शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा . इसीलिए उसे बहुत साधारण की तरह अपना जीवन व्यतीत करना है , जब तक वह जमीन पर है, या केस की कार्रवाई शुरू होकर, निकाल लग जाता है तब तक, और उसके बाद भी . धन्यवाद


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