राशन घोटाले की शिकायत करने पर मेरे ऊपर झूठा मुकदमा लगा दिया गया है मैं क्या करूं


सवाल

मैंने खाद्यान्न विभाग में उचित दर विक्रेता और क्षेत्रीय प्रशासन की मिली भगत से एक व्यक्ति के एक से अधिक राशनकार्ड बनाकर व एक व्यक्ति का नाम राशनकार्ड में अनेक बार रिपीट कर व कोटेदार को आवश्यकता से अधिक राशन देकर सरकारी खाद्यान की लूट अमेठी जनपद उत्तर प्रदेश में की जा रही थी इस प्रकरण की जब मैंने शिकायत की तो हमपर दबाव बनाने के लिए पहला झूठा मुकदमा पूर्ति निरीक्षक से फिर दूसरा मुकदमा scst का ब्लाक वालो ने सफाईकर्मी के माध्यम से दर्ज कराया फिर भी शिकायत करना न बन्द करने पर हमपर 110 जी फिर गुण्डा एक्ट की नोटिस में ओवरराइटिंग कर जिलाबदर किया जिसपर मंडलायुक्त महोदय ने रोक लगा दी इस प्रकार मेरा काम धाम बन्द हो गया मई झूठे मुकदमो से परेशान हूँ वाही हमारी शिकायतों पर साक्ष्य होने के बाद भी प्रशासन गलत करने वाले कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही नहीं करता मै क्या करू

उत्तर (2)


58 votes

आपके प्रकरण में सरकारी खाद्यान्न की चोरी तथा प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं। आपके द्वारा शिकायत करने पर आपके विरुद्ध प्रतिशोधस्वरूप झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, जो कि कानूनी दृष्टि से अस्वीकार्य है। झूठे आपराधिक मामलों का सामना करना निश्चित रूप से कष्टदायक है, परंतु आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आपके पास कानूनी संरक्षण के कई प्रभावी उपाय मौजूद हैं। सर्वप्रथम, आपको अपनी शिकायत की सभी प्रतियां, पूर्ति निरीक्षक को दी गई रिपोर्ट, तथा आपके विरुद्ध दर्ज सभी मुकदमों की प्रतियों को सुव्यवस्थित रूप से संकलित करना होगा। यह साक्ष्य आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इसके पश्चात, आप उच्च न्यायालय में एक आवेदन दाखिल कर सकते हैं, जिसका उद्देश्य आपके विरुद्ध दर्ज झूठे मुकदमों को रद्द करवाना होगा। अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से बताएं कि ये सभी मामले आपके द्वारा भ्रष्टाचार की शिकायत करने के कारण, आपको दबाव में लाने तथा परेशान करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। न्यायालय यदि साक्ष्यों को संतोषजनक पाता है, तो वह इन झूठे मामलों को रद्द करने का आदेश दे सकता है। साथ ही, चूंकि प्रशासन आपकी शिकायतों पर उचित कार्यवाही नहीं कर रहा है, इसलिए आप मंडलायुक्त को इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र देकर जिलाधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील दाखिल करें। मंडलायुक्त ने पहले ही जिलाधिकारी के कुछ निर्णयों पर रोक लगा दी है, जो आपके पक्ष में एक अच्छा संकेत है। इसलिए आप मंडलायुक्त से निवारण की पूरी उम्मीद रख सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, आप उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अथवा खाद्य आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत भेजें, जिसमें सभी तथ्यों को विस्तार से लिखें। इसमें उन अधिकारियों के नाम दर्ज करना अनिवार्य है जो आपकी सही शिकायत के बावजूद कार्यवाही से बच रहे हैं। यदि स्थानीय पुलिस आपको परेशान करती है, तो आप उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर सकते हैं। न्यायालय ऐसी परिस्थितियों में निर्दोष व्यक्ति को पूर्ण संरक्षण प्रदान करता है। आपको अपने कार्य से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ना हर नागरिक का कर्तव्य है। अत्यंत परेशानी की स्थिति में, आप जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क कानूनी परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। कानून हमेशा सच्चाई और न्याय के पक्ष में खड़ा होता है। आपको धैर्य रखते हुए, सभी न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सही से पालन करना चाहिए। आपके सभी साक्ष्य यदि ठोस हैं, तो अदालत दोषी अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा देगी और आपका व्यवसाय पुनः सुचारु रूप से चलने लगेगा। अपनी लड़ाई को कानूनी दायरे में रखें और प्रशासन की मनमानी के आगे न झुकें।


अस्वीकरण: उपर्युक्त सवाल और इसकी प्रतिक्रिया किसी भी तरह से कानूनी राय नहीं है क्योंकि यह LawRato.com पर सवाल पोस्ट करने वाले व्यक्ति द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है और LawRato.com में अपराधिक वकीलों में से एक द्वारा जवाब दिया गया है विशिष्ट तथ्यों और विवरणों को संबोधित करें। आप LawRato.com के वकीलों में से किसी एक से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए अपने तथ्यों और विवरणों के आधार पर अपनी विशिष्ट सवाल पोस्ट कर सकते हैं या अपनी सवाल के विस्तार के लिए अपनी पसंद के वकील के साथ एक विस्तृत परामर्श बुक कर सकते हैं।


भारत के अनुभवी अपराधिक वकीलों से सलाह पाए