मुस्लिम समाज स्वर्गीय पिता संपत्ति ब


सवाल

मुस्लिम समाज में स्वर्गीय पिता की संपत्ति को बेटी ने अपने बेटे और पोते को गवाह बनाकर धोखाधड़ी से अपनी वृद्धा मां व कान से विकलांग भाई से अपने नाम गिफ्ट डीड करवा ली न्यायालय इस गिफ्ट को कितने समय में अपना फैसला देगा, क्या बेटे और पोते को गवाह बनाया जा सकता है या गिफ्ट डीड में डोनर का मोबाइल नंबर ना लगाकर डोनी के बेटे का नंबर लगाना न्यायालय किस पक्ष में देखेगा

उत्तर (2)


256 votes

मुस्लिम समाज में यदि बेटी ने अपने स्वर्गीय पिता की संपत्ति अपने नाम पर गिफ्ट डीड के माध्यम से करवाने के लिए धोखाधड़ी की हो, खासकर जब उसकी मां वृद्धा और भाई कान से विकलांग हो, तो यह मामला अदालत में गंभीरता से देखा जाएगा। अगर उसने अपने ही बेटे और पोते को गवाह बनाया है, तो ऐसे गवाह निष्पक्ष नहीं माने जाएंगे और उनकी गवाही पर अदालत शक कर सकती है। साथ ही, अगर गिफ्ट डीड में दाता का मोबाइल नंबर न लगाकर बेटी या उसके बेटे का नंबर लगाया गया है, तो यह भी धोखाधड़ी का संकेत माना जा सकता है। ऐसे मामलों में अदालत सबूतों और गवाहों के आधार पर फैसला देती है, इसलिए इसमें कुछ समय लग सकता है—आम तौर पर छह महीने से दो साल तक। अगर अदालत को लगे कि गिफ्ट धोखे से करवाई गई है, तो वह इसे रद्द कर सकती है और संपत्ति फिर से असली मालिक या उसके वारिसों के नाम पर वापस जा सकती है।


अस्वीकरण: उपर्युक्त सवाल और इसकी प्रतिक्रिया किसी भी तरह से कानूनी राय नहीं है क्योंकि यह LawRato.com पर सवाल पोस्ट करने वाले व्यक्ति द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है और LawRato.com में अपराधिक वकीलों में से एक द्वारा जवाब दिया गया है विशिष्ट तथ्यों और विवरणों को संबोधित करें। आप LawRato.com के वकीलों में से किसी एक से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए अपने तथ्यों और विवरणों के आधार पर अपनी विशिष्ट सवाल पोस्ट कर सकते हैं या अपनी सवाल के विस्तार के लिए अपनी पसंद के वकील के साथ एक विस्तृत परामर्श बुक कर सकते हैं।


भारत के अनुभवी अपराधिक वकीलों से सलाह पाए


अपराधिक कानून से संबंधित अन्य प्रश्न