पुलिस द्वारा जब्त बाइक को रिहा करने के लिए जुर्माना कैसे दे सकता हूं
सवाल
उत्तर (1)
हाँ, आपकी स्थिति में वाहन को रिहा करवाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। चूंकि आपकी बाइक को पुलिस ने हिरासत (Seizure) में लिया है और मामला लापरवाही से वाहन चलाने (Section 279) के तहत दर्ज किया गया है, इसलिए अब वाहन को छोड़ने का अधिकार केवल संबंधित मजिस्ट्रेट के पास है। पुलिस सीधे तौर पर आपकी बाइक नहीं छोड़ सकती।
आपको वाहन वापस पाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:
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रिहाई का आवेदन: आपको अपने क्षेत्र के संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में 'सुपुर्दगी' (Superdari) के लिए एक आवेदन देना होगा। यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 514 (जो पुराने कानून CrPC में धारा 451 थी) के तहत लगाया जाता है।
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अदालती कार्यवाही: जब आप आवेदन जमा करेंगे, तो अदालत पुलिस से रिपोर्ट मांगेगी। इसके बाद आपको बाइक के असली कागजात जैसे आरसी (RC), बीमा (Insurance) और अपना ड्राइविंग लाइसेंस कोर्ट में दिखाने होंगे। अदालत आपसे एक 'सुपुर्दगी बॉन्ड' भरने को कहेगी, जिसमें आप यह वचन देते हैं कि केस चलने तक आप वाहन को बेचेंगे नहीं और जरूरत पड़ने पर उसे कोर्ट में पेश करेंगे।
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जुर्माना और सम्मन: जहाँ तक जुर्माने की बात है, पुलिस अधिकारी ने सही कहा है। धारा 279 और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए आपको कोर्ट से सम्मन (Summons) भेजा जाएगा। अदालत में पेश होने पर आप अपनी गलती स्वीकार कर सकते हैं, जिसके बाद जज आप पर जुर्माना (Fine) लगाएंगे। जुर्माना भरने के बाद केस का निपटारा हो जाएगा।
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रिलीज ऑर्डर: एक बार जब अदालत वाहन रिहा करने का आदेश (Release Order) जारी कर देती है, तो आपको उसकी कॉपी लेकर उस पुलिस स्टेशन या यार्ड में जाना होगा जहाँ आपकी बाइक खड़ी है। वहां की लिखा-पढ़ी पूरी करने के बाद आपको आपकी बाइक सौंप दी जाएगी।
मेरा सुझाव है कि आप किसी वकील की मदद लें ताकि कागजी कार्रवाई जल्दी पूरी हो सके और आपकी बाइक ज्यादा समय तक थाने में खड़ी न रहे।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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