नियमित जमानत और अग्रिम जमानत मिलने में कुल कितना समय लगता है
सवाल
उत्तर (1)
नियमित जमानत और अग्रिम जमानत मिलने में लगने वाला समय इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस अदालत में आवेदन कर रहे हैं। नियमित जमानत (Regular Bail) तब मांगी जाती है जब व्यक्ति पहले से पुलिस की हिरासत में हो, जबकि अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) गिरफ्तारी की आशंका होने पर पहले ही मांगी जाती है।
यदि आप सत्र न्यायालय (Sessions Court) में नियमित जमानत के लिए अर्जी देते हैं, तो आमतौर पर इसमें 2 से 4 दिन का समय लगता है। कोर्ट आपकी अर्जी पर पुलिस से रिपोर्ट मांगता है और बहस सुनने के बाद फैसला सुना देता है। गंभीर मामलों में इसमें एक हफ्ते तक का समय भी लग सकता है।
अग्रिम जमानत के मामले में भी सत्र न्यायालय लगभग 3 से 7 दिनों के भीतर निर्णय ले लेता है। यदि सत्र न्यायालय से जमानत खारिज हो जाती है और आप उच्च न्यायालय (High Court) जाते हैं, तो वहां प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है। उच्च न्यायालय में सरकारी वकील को नोटिस जारी किया जाता है और केस डायरी मंगवाई जाती है, जिसमें अक्सर 2 से 4 हफ्ते का समय लग सकता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) के नए नियमों के तहत भी यह कोशिश की जाती है कि जमानत याचिकाओं का निपटारा जल्द से जल्द हो। समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि अपराध कितना गंभीर है और क्या पुलिस को जांच के लिए आरोपी की और अधिक हिरासत (Custody) की जरूरत है।
यदि मामला बहुत ही संवेदनशील है या उसमें बहुत अधिक गवाह हैं, तो अदालत फैसला सुरक्षित रखने के लिए कुछ और समय ले सकती है। साधारण मामलों में सत्र न्यायालय से राहत मिलना काफी तेज होता है।
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