क्या 75 साल के बुजुर्ग को IPC की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है


सवाल

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक 75 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति को केवल एफआईआर के आधार पर और बिना किसी गहन जांच या अदालत के आदेश के 10 दिनों तक हिरासत में रखना एक गंभीर कानूनी विषय है। इस स्थिति में यह समझना जरूरी है कि क्या पुलिस के पास ऐसे अधिकार हैं और पीड़ित व्यक्ति के पास बचाव के क्या रास्ते उपलब्ध हैं।

उत्तर (3)


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कानूनी तौर पर देखा जाए तो पुलिस किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है यदि उसके खिलाफ संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की शिकायत दर्ज हुई हो। भारतीय कानून में उम्र के आधार पर गिरफ्तारी से पूरी तरह छूट नहीं दी गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार 6 साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी के सख्त नियम हैं। आपके द्वारा बताई गई धाराएं जैसे 419 और 420 धोखाधड़ी (Cheating) से संबंधित हैं, जिनमें पुलिस को गिरफ्तारी से पहले अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

पुलिस को यह अधिकार है कि वह बिना वारंट के गिरफ्तार कर सके, लेकिन उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है। अगर उन्हें १० दिनों से जेल में रखा गया है, तो इसका मतलब है कि उन्हें अदालत में पेश किया गया होगा और वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेजा गया होगा। बिना किसी अदालती कार्यवाही के किसी को १० दिन तक लॉकअप में रखना पूरी तरह गैरकानूनी (Illegal) है।

चूँकि नए नियमों के अनुसार अब भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) लागू हो चुकी है, इसलिए इन धाराओं की प्रक्रिया भी उसी के अनुसार चलेगी। यदि पुलिस ने केवल पैसे के प्रभाव में आकर या बिना किसी ठोस सबूत के यह कदम उठाया है, तो आप उच्च न्यायालय (High Court) में गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए याचिका दायर कर सकते हैं। इसके साथ ही आप संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ मानवाधिकार आयोग या वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत भी कर सकते हैं।

बुजुर्ग व्यक्ति की सुरक्षा के लिए सबसे पहले आपको वकील के माध्यम से जमानत याचिका (Bail Application) लगानी चाहिए। 75 साल की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए अदालत अक्सर जमानत देने में नरमी बरतती है। साथ ही, अगर प्राथमिकी (First Information Report) झूठी है, तो उसे रद्द करवाने के लिए भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।

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आपराधिक कानून एक वरिष्ठ नागरिक को कोई प्रतिरक्षा नहीं देता है। यदि आपको जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता है, तो आप पुलिस से ही जमानत प्राप्त कर सकते हैं। अगर आपको गैर-जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता है, तो केवल अदालत ही आपको जमानत दे सकती है। अगर आपको जमानत मिल जाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि मुकदमा खत्म हो गया है।

65 votes

डियर सर/मैम हमने आपके सवाल को बहुत ध्यान से पढ़ा है, आपका सवाल यह है कि बिना कोर्ट के आदेश के 75 साल के आदमी को यूपी पुलिस ने बिना जांच पड़ताल के सिर्फ एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार कर लिया और 10 दिनों से सलाखों के पीछे डाल दिया, सिर्फ इसलिए कि उसे अच्छा पैसा मिला। अदर पार्टी, आप ऐसा कर सकते हैं हाई कोर्ट माई 482 का केस करके पता कर सकते हैं।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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