क्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग फैसले


सवाल

क्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के फैसले को चुनौती दी जा सकती है और दी जा सकती है तो कहाँ यदि उसके द्वारा केस बंद करने का निर्णय इस बात को कह कर दिया गया है कि ये मामला समय अवधि के परे हो गया है तथा इसमें राज्य मानवाधिकार आयोग में भी सुनवाई नहीं होगी? क्योंकि मेरे मामले में प्रताड़ना चली हैं तथा सरकारी अधिकारी उस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और मेरे परिवार वाले तथा अन्य लोगों के द्वारा इस मामले में सरकारी अधिकारियों के द्वारा सांठगांठ करवा कर यह सब किया जा रहा है जिसके कारण मामला दर्ज नहीं हो पा रहा है तथा पुलिस भी मुझे काफी परेशान कर रही है?

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नमस्कार जैसा कि आपने कहा क्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में चल रहा था जिसमें की मानवाधिकार आयोग द्वारा आदेश पारित किया गया है के इस मामले को बंद कर दिया जाए इस मामले की सुनवाई मानवाधिकार आयोग द्वारा भी नहीं की जाएगी यह मामला मेरा बंद किया जाता है इन सब चीजों को देखते हुए आपका रिश्तेदार दुश्मन सभी लोग सरकारी अफसरों से मिलकर पुलिस से मिलकर सब कुछ लीपापोती करने में लगे हुए हैं ऐसी स्थिति में आपके पास सिर्फ एक ही चारा बसता है सर्वोच्च न्यायालय भारत देश यानी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में मुकदमा फाइल करनी होगी साथ साथ कोर्ट में आपको पूरी तरह इस केस को लेकर खड़ा होना होगा तभी इस केस में न्याय हो सकता है .


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