कितने दिन की FIR के बाद हम कोर्ट में केस कर सकते हैं


सवाल

मेरी बहन के साथ धोखा हुआ है, लड़का शादी के समय फरार हो गया। हमने पुलिस में धारा 420 के तहत केस दर्ज कराया है। एफआईआर हुए 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन पुलिस न तो लड़के को गिरफ्तार कर रही है और न ही मामला कोर्ट में भेज रही है। एफआईआर के बाद कोर्ट में केस पेश करने की समय सीमा क्या है?

उत्तर (3)


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धोखाधड़ी (Cheating) यानी धारा 420 (अब नए कानून में धारा 318) एक गंभीर और संज्ञेय (Cognizable) अपराध है। इसमें पुलिस को अपराधी को बिना वारंट के गिरफ्तार करने और तुरंत जांच शुरू करने का अधिकार होता है।

आपकी स्थिति में कानूनी नियम और समय सीमा इस प्रकार हैं:

1. गिरफ्तारी की समय सीमा: कानून में गिरफ्तारी के लिए कोई निश्चित 'दिन' तय नहीं हैं। पुलिस आरोपी को तब गिरफ्तार करती है जब उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिल जाएं या उन्हें लगे कि वह भाग सकता है। हालांकि, अगर आरोपी फरार है, तो पुलिस उसकी तलाश के लिए दबिश दे सकती है।

2. कोर्ट में केस पेश करना (चार्जशीट): पुलिस जांच पूरी करने के बाद कोर्ट में 'चार्जशीट' (Chargesheet) दाखिल करती है। आमतौर पर, जिन अपराधों में 10 साल से कम की सजा है, उनमें पुलिस को 60 दिनों के भीतर जांच पूरी कर कोर्ट में रिपोर्ट देनी होती है। 15 दिन का समय कानूनन बहुत कम है, इसलिए पुलिस शायद अभी सबूत जुटा रही होगी।

3. 24 घंटे का नियम: अगर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है, तो उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है। चूंकि अभी गिरफ्तारी ही नहीं हुई है, इसलिए मामला अभी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ है।

4. अगर पुलिस कार्यवाही न करे तो क्या करें? यदि 15 दिन बाद भी पुलिस कोई जवाब नहीं दे रही है, तो आप ये कदम उठा सकते हैं:

  • उच्च अधिकारियों से मिलें: आप जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या डीएसपी (DSP) को लिखित शिकायत दें कि थाना स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।

  • मजिस्ट्रेट के पास अर्जी (धारा 156(3)): आप अपने वकील के जरिए संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी लगा सकते हैं। कोर्ट पुलिस से इस केस की 'प्रोग्रेस रिपोर्ट' मांग सकता है और उन्हें जल्द जांच पूरी करने का आदेश दे सकता है।

  • रिट याचिका (Writ Petition): यदि मामला बहुत गंभीर है और पुलिस जानबूझकर मदद नहीं कर रही, तो हाई कोर्ट में केस की सही जांच (Fair Investigation) के लिए याचिका दायर की जा सकती है।

मेरी सलाह है कि आप पहले थाने के 'इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर' (IO) से मिलकर केस की डायरी और प्रोग्रेस के बारे में पूछें। अगर वे टालमटोल करें, तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखें।

135 votes

नमस्ते 420 मामले के तहत दर्ज की गई कोई भी प्राथमिकी एक संज्ञेय अपराध है। आम तौर पर, संज्ञेय अपराध का मतलब है कि एक पुलिस अधिकारी को बिना वारंट के गिरफ्तारी करने और अदालत की अनुमति के साथ या उसके बिना जांच शुरू करने का अधिकार है। इसलिए, सुनिश्चित नहीं है कि पुलिस अदालत की अनुमति से अपराध का संज्ञान क्यों लेना चाहती है। अदालतें आमतौर पर 24 घंटे के भीतर ऐसे अपराधों का संज्ञान लेती हैं। आपको उच्च न्यायालय में आवेदन करना चाहिए और प्राथमिकी दर्ज करने और जांच शुरू करने के लिए निर्देश मांगना चाहिए।

89 votes

यदि कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट प्राप्त होती है तो उसे अपराध दर्ज करने की तारीख से 24 घंटे के भीतर अदालत को भेज देना चाहिए। कृपया देखें कि आपको कोई रसीद दी गई है या नहीं या फिर कृपया अपनी शिकायत को एक श्वेत पत्र में एन्क्रिप्ट करें और संबंधित पुलिस स्टेशन, पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकार वाले स्थानीय मजिस्ट्रेट और जिला कलेक्टर को पोस्ट रजिस्टर करें, तभी यह पंजीकृत हो जाएगा और आप कर सकते हैं न्याय प्राप्त करो


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