सवाल


मेरे दादा जी 1947 से बटवारा होने के बाद एक मकान में रहते अब कोई व्यक्ति ये आकर कहता है उस मकान का वह मालिक है तो पिताजी ने कोट की शरण ली अब मालूम पर रहा है कि उस व्यक्ति ने किसी तरह से उपरोक्त मकान की रजिस्ट्री किसी दूसरे के नाम करवा दी है तो किया उस रजिस्ट्री को सही माना जायेगा किया कानून से हमे हमारा हक मिल सकता है किया रजिस्ट्री केंसिल हो सकती है

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