रेंट एग्रीमेंट बनाने के नियम


March 18, 2020
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



रेंट या किराया आज के समय में आय का एक काफी अच्छा और बेहतर साधन बन गया है। आज के समय जहां कोई भी व्यक्ति मकान जैसी प्रॉपर्टी के मालिक अपनी खाली पड़ी प्रॉपर्टी को किराए पर दे कर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ किराए के मकान उन लोगों के लिए भी वरदान के समान होता हैं, जो पैसे न होने या पैसों की कमी के कारण अपना आशियाना नहीं बना पाते हैं। लेकिन किराए पर ऐसी प्रॉपर्टी को लेते या देते समय जो सब से महत्त्वपूर्ण चीज होती है, उसे रेंट एग्रीमैंट के नाम से जाना जाता है, क्योंकि रेंट एग्रीमेंट से ही आप क़ानूनी रूप से किसी भी संपत्ति या मकान के किरायेदार बन सकते हैं, और केवल रेंट एग्रीमेंट के होते हुए ही आप एक किरायेदार के सभी अधिकारों का फायदा भी उठा सकते हैं।

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रेंट एग्रीमेंट क्यों जरूरी होता है?

रेंट एग्रीमैंट एक प्रकार का क़ानूनी दस्तावेज होता है, जो किसी भी प्रॉपर्टी को किराए पर देने से पहले किराएदार और मकान मालिक के आपसी समझौते से तैयार किया जाता है। इस रेंट एग्रीमैंट में मकान मालिक की सारी शर्तें लिखित रूप में होती हैं, जिस पर मकान मालिक व किराएदार की सहमति के बाद ही दस्तखत भी होते हैं, और दोनों मकान मालिक और किरायेदार के बीच जब भी कोई विवाद की स्तिथि आती है, तो यह रेंट एग्रीमेंट ही न्यायालय में दोनों पक्षों के विवाद को निपटाने के काम आता है। रेंट एग्रीमैंट भविष्य के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है। अगर रेंट एग्रीमेंट में किसी भी प्रकार के बदलाव का प्रस्ताव मकान मालिक या किराएदार द्वारा रखा जाना हो, तो उस के लिए दूसरे पक्ष को 30 दिन पहले नोटिस दिया जाना अनिवार्य होता है।
 

रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा बनाते समय आवश्यक बातें

किसी भी रेंट एग्रीमेंट या किरायानामा को बनाते समय मुख्य रूप से निम्न बातों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए, ये बातें इस प्रकार हैं –

  1. गवाह की पात्रता रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा बनाते समय जिन 2 लोगों की गवाही लग रही है। वह गवाह शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम होना चाहिए। साथ ही गवाहों की उम्र 18 वर्ष से ऊपर होनी चाहिए। और उन पर किसी भी प्रकार का कोई दवाब नहीं होना चाहिए।

  2. एग्रीमेंट की समयसीमा रजिस्टर करें – यदि आप एग्रीमेंट को सिर्फ नोटरी करवा रहे हैं। तो आप अपना एग्रीमेंट 11 महीने का ही बनाना चाहिए। क्योंकि 11 महीने का एग्रीमेंट सरकार की दृष्टि में अनरजिस्टर्ड होता है। जिसका उपयोग किया जा सकता है।

  3. प्रॉपर्टी पर कोई विवाद है या नहीं आपको यह भी चेक कर लेना है। जो प्रॉपर्टी आपको किराए पर ले रहे हैं। उस पर किसी प्रकार का कोई विवाद या स्टे आर्डर तो नहीं है।
     

रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा का प्रारूप

रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा बनाने के लिए आपको प्रारूप की आवश्यकता होती है। यदि आपके पास रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा का प्रारूप नहीं है। तो आप नीचे दिया गया प्रारूप का उपयोग कर सकते हैं –

इकरारनामा बाबत किराया / किरायानामा –

वार्षिक किराया                                                      , रूपये
स्टाम्प                                                                     रूपये
स्टाम्प क्रमांक दिनांक
स्टाम्प की संख्या

किरायानामा आज दिनांक ———————————– को श्री / श्रीमती —————————————-पुत्र / पुत्री / धर्मपत्नी / विधवा——————– आय वर्ष ——————– निवासी —————-तहसील ————-

जिला —————– राज्य——————- । (प्रथम पक्ष/मालिक)

श्री / श्रीमती ——————- पुत्र / पुत्री / धर्मपत्नी / विधवा—— आयु वर्ष —— निवासी ——तहसील —– जिला —— राज्य——————(द्धितीय पक्ष / किरायेदार ) के बीच निष्पादित किया गया है/ लिखा गया है।

जो कि प्रथम पक्ष अनुसूची में  दर्शाया गया है, एक मकान / प्लाट / फ्लैट / दुकान / फैक्टरी / औद्यौगिक प्लाट / जिसका प्रथम पक्ष मालिक व काबिज है। जिस पर किसी प्रकार का कोई भार नहीं है। अनुसूची में  दर्शाई गई अचल संपति पर किसी प्रकार का कोई कर्जा, किसी बैंक या सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्था से प्राप्त नहीं किया हुआ। संबंधित अचल संपति किसी नीलामी व कुर्की आदि में  शामिल नहीं है। संबंधित अचल संपति को आज से पहले किसी प्रकार से रहन – बैय - हिब्बा व अन्य तरीके पर हस्तान्तरित नहीं किया गया है। अचल संपति को किराये पर देने की बावत किसी प्रकार की कोई रूकावट किसी विभाग या किसी न्यायालय की नहीं है। उक्त अचल संपति पर प्रथम पक्ष का कब्जा दिनांक ————— से बतौर किरायेदार राशि——————- रू0 प्रति मास पर बतौर किराये के रूप में  देनी स्वीकार की है। जिसकी बावत किरायानामा दिनांक ————– को किया गया है। जिसका किरायानामा निष्पादित करना प्रथम पक्ष व द्धितीय पक्ष उचित समझते है । इसलिए अब प्रथम पक्ष व द्धितीय पक्ष उक्त किरायानामा दिनांक ————— तक के लिये निष्पादित करते है कि प्रथम पक्ष ने अपनी उक्त राशि —————- रू0 प्रति मास किराये पर द्धितीय पक्ष को निम्नलिखित शर्तो पर दी है : –
 

  1.  यह है कि मौके पर कब्जा द्धितीय पक्ष का दिनांक ————– से दे दिया है और यह किरायानामा दिनांक —————- तक की अवधि तक वैध रहेगा।

  2. किराया की इस अवधि के दौरान द्धितीय पक्ष किराये के रूप में  प्रथम पक्ष को ————— रू0 प्रति मास के हिसाब से हर मास की ————————————–. तिथि तक अग्रिम रूप में  प्रथम पक्ष को नगद प्रदान कर देगा।

  3.  यह है कि उक्त अवधि के दौरान सरकारी लगान, पानी एवं बिजली का खर्च द्धितीय पक्ष स्वंय वहन करता रहेगा। जिसके बारे में प्रथम पक्ष कोई आपत्ति उत्पन्न नहीं करेगा।

  4.  यह है कि उक्त अवधि समाप्त होने पर द्धितीय पक्ष, प्रथम पक्ष को वापिस कर देगा।

  5.  यह है कि उक्त अवधि के दौरान भुगतान की रसीद प्रथम पक्ष्, द्धितीय पक्ष को देगा।

  6. यह है कि उक्त अवधि के दौरान प्रथम पक्ष व द्धितीय पक्ष के बीच कोई विवाद होता है तो पंच फैसला दोनों पक्षों को मान्य होगा।

  7. यह है कि द्धितीय पक्ष ने —————————— रूपये (शब्दो में——————रूपये) केवल नगद प्रथम पक्ष को बतौर जमानत के रूप में अदा कर दिये हैं, जो कि बिना किसी ब्याज के प्रथम पक्ष द्धितीय पक्ष को सम्बन्धित अचल सम्पति के खाली करने के समय बकाया किराया व अन्य देनदारी आदि काट कर वापिस कर देगा।

  8. यह है कि उपरोक्त म्यांद के बाद यदि किरायेदारी की म्यांद बढ़ाई जाती है तो प्रत्येक मास——– के बाद —– प्रतिशत की दर से किराये में  वृद्धि होगी तथा किरायेदारी की म्यांद केवल प्रथम पक्ष की सहमति द्वारा ही बढ़ाई जा सकेगी।

  9.  यह है कि द्धितीय पक्ष सम्बन्धित अचल सम्पति को केवल——— कार्य के लिए इस्तेमाल करेगा।

  10. यह है कि द्धितीय पक्ष सम्बन्धित अचल सम्पति पर या इसकी किसी भी निर्माण में  किसी भी किस्म की कोई तोडफोड या नया निर्माण नहीं करेगा तथा किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं देगा तथा प्रथम पक्ष को हक होगा कि वह किसी भी समय निरीक्षण के लिए आ सकता है, जिसका द्धितीय पक्ष को कोई आपत्ति नहीं होगी तथा द्धितीय पक्ष कोई ऐसा कार्य नहीं करेगा जो कि कानून की नजरों में गलत होगा।

  11.  यह है कि सम्बन्धित अचल सम्पति में  छोटी मुरम्मत जैसे कि बिजली की तारों में परेशानी, पानी की लीकेज आदि द्धितीय पक्ष स्वंय करेगा।

  12.  यह है कि जब भी किसी पक्ष को उपरोक्त अचल सम्पति को खाली करना या कराना हो तो वह दूसरे पक्ष को दो महिने पहले नोटिस देगा।

  13.  यह है कि उपरोक्त किरायानामा के दोनो पक्ष व उनके वारसान आदि हमेंशा पाबन्द रहेगे तथा इसकी शर्तो का पालन करेगें।
     

अतः यह किराया नामा लिख दिया है कि बतौर साक्षी प्रमाण रहे ताकि समय पर काम आये।

दिनांक——————

अनुसूचि (पहचान के लिये अचल सम्पति का विवरण)


नक्शा सीमा व पैमाईश मकान /प्लाट/फलेट/दुकान/फैक्टरी/उद्योगिक प्लाट के केस में
पूर्व : –   —————————- फुट————————————- इंच————————।
पश्चिम :-   ————————- फुट————————————– इंच—————————।
उतर :-   —————————फुट————————————– इंच—————————।
दक्षिण :-  ————————–फुट————————————– इंच—————————।
स्थित—————————–

साक्षीगणः

1.                                                                              हस्ताक्षर प्रथम पक्ष

2.                                                                              हस्ताक्षर द्धितीय पक्ष

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रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेज

रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा बनाने के लिए आपको मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी

  1. किराएदार मकान मालिक दोनों का आधार कार्ड की फोटो कॉपी एवं ओरिजिनल

  2. दो गवाह एवं गवाहों के आइडेंटी प्रूफ के रूप में आधार कार्ड की फोटो कापी एवं ओरिजिनल

  3. स्टांप पेपर

  4. किराएदार मकान मालिक का पासपोर्ट साइज फोटो

  5. मकान का किराया एवं सिक्योरिटी धनराशि
     

रेंट एग्रीमेंट बनाने के लिए आवश्यक तत्व

  1. रेंट क्लॉज

सबसे पहले आपको यह तय करना होगा कि आप हर महीने कितना किराया चुका पायेंगे। इसके साथ ही मकान मालिक के द्वारा हर साल किराये में कितने प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। अगर रेंट एग्रीमेंट के दस्तावेज में सालाना वृद्धि का वर्णन नहीं की गयी है, और मकान मालिक इसका फैसला आने वाले कुछ महीने में करेगा, तो यह आपके लिए मोलभाव करने का यह बेहतर अवसर हो सकेगा।

आमतौर पर सालाना किराया 10 फीसदी तक बढ़ जाता है। अगर आपको यह ठीक लगता है, तो आप रेंट की प्रॉपर्टी लेने के लिए सहमत हो सकते हैं। हर 11 महीने के बाद किराये का एग्रीमेंट नया बना दिया जाता है। अगर एग्रीमेंट 11 महीने से अधिक का है, तो इसका रजिस्टर्ड होना बहुत जरूरी है। आपको सिक्योरिटी की राशि जमा करने के साथ - साथ मकान खाली करने की स्थिति में इसकी वापसी की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी रखना बहुत जरूरी होता है। इस दस्तावेज में रेंट का एग्रीमेंट रद्द होने अर्थात ख़त्म होने की शर्त भी लिखी होती है। रेंट एग्रीमेंट के दस्तावेज में नोटिस पीरियड का भी जिक्र किया जाता है। इसके लिए बेहतर होगा कि आप रेंट को चुकाने के माध्यम के बारे में (कैश, चेक या एन. ई. एफ. टी. / आर. टी. जी. एस. / आई. एम. पी. एस.) के बारे में भी रेंट एग्रीमेंट में लिखवा दें, जिससे कि आप बाद में होने वाले किसी विवाद से बचे रहेंगे।

  1. फीस और अन्य चार्ज

यह चेक कर लें कि एग्रीमेंट में किराया देर से चुकाने पर किसी प्रकार की पेनल्टी या जुर्माना तो नहीं है। किराया को चुकाने की तारीख के बारे में भी रेंट एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए। अगर एग्रीमेंट में किसी जुर्माने के बारे में लिखा गया है, तो आपको किराया समय से चुकाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा आपको बिजली, पानी के बिल, हाउस टैक्स और जिम, स्विमिंग पुल, पार्किंग, क्लब आदि की सुविधा और उसके बदले भुगतान के बारे में भी ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि जो भी राशि आप चुका रहे हैं, उसके बारे में एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है। यह ध्यान रखें कि पिछला मेंटेनेंस का चार्ज क्या था, और आप से रहने वाले पिछले किरायेदार ने सभी बिल का भुगतान कर दिया है, या नहीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि उस किराये के घर में शिफ्ट करने से पहले मकान मालिक से मिलकर पिछले बकाये के बारे में सभी जानकारी एकत्र कर लें।

  1. प्रॉपर्टी को जांच लें

जिस घर को आप रहने के लिए किराये के लिए ले रहे हैं, उस घर या प्रॉपर्टी को सही तरीके से देख लेना ही सही कदम हो सकता है। बहुत से लोग छोटी - छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन उन छोटी - छोटी बातों पर ध्यान देना ही बहुत जरूरी होता है। दीवार, फ्लोर, पेंट, बिजली के सामान आदि की सही तरीके से जांच कर लें। किचन, बाथरूम की फिटिंग सही हालत में है, या नहीं, इसे जरूर चेक कर लेना चाहिए। अगर घर में कुछ भी ख़राब है, या सही से काम नहीं कर रहा है, तो उस के बारे में मकान मालिक को जरूर बताएं। शिफ्ट करने से पहले उसे लगवा लें या ठीक करा लें। यहां मकान मालिक को बताने का उद्देश्य यह है, कि उस खराबी के लिए आप जिम्मेदार नहीं हैं, यह बात मकान मालिक को पता रहनी चाहिए।

  1. रिपेयर एवं मेंटेनेंस

घर के रेगुलर मेंटेनेंस और पेंट वगैरह की जिम्मेदारी किसकी होगी, इस बात को भी रेंट एग्रीमेंट में साफ़ - साफ़ लिखा होना चाहिए। एक बार घर में शिफ्ट हो जाने के बाद में इस बात पर किसी प्रकार का कोई विवाद ना हो, इसलिए पहले से इसे हर बात साफ़ कर लें। इसमें पुराने बिजली के तारों से लेकर नल और किचन की चिमनी जैसी बहुत सी चीजें होती हैं। यह भी जांच कर लें कि अगर भविष्य में किसी प्रकार की कोई दुर्घटना होती है, तो उस स्थिति में घर को होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा। एग्रीमेंट में इस बात का भी साफ़ उल्लेख होना चाहिए कि किस तरह के नुकसान की जिम्मेदारी किस पर है। यह भी उचित रूप से जांच कर लें, कि मरम्मत का खर्च आप करेंगे तो वह किराये में कट जायेगा या फिर मकान मालिक उसे आपको बाद में चुका देगा।

  1. अन्य आवश्यक नियम एवं शर्त

रेंट एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ लें और यह जांच करें कि कुछ और तो ऐसी बात तो नहीं है, जो आपके लिए जानना बहुत जरूरी है। बहुत से मकान मालिक नॉन वेज खाने के साथ सोसाइटी में देर से आने जाने पर पाबन्दी लगते हैं, तो ऐसे बातों का रेंट एग्रीमेंट में वर्णन करना बहुत ही अनिवार्य होता है। यह भी ध्यान रखें, कि जो घर आप किराये पर ले रहे हैं, वह रेंट के लिए डील आपके मकान मालिक से ही हो रही है, या कोई और उसमें शामिल है। सेल डीड जैसे डॉक्युमेंट को सत्यापित कर लें। इसके साथ ही हाउसिंग सोसाइटी से अपनी एन. ओ. सी. भी ले लें।

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रेंट एग्रीमेंट बनाते समय एक वकील की जरूरत क्यों होती है?

यदि आप कोई प्रॉपर्टी या मकान किराये पर लेने जा रहें हैं, तो सबसे पहले आप उस संपत्ति का किरायानामा जरुर बनवा लें। क्योंकि रेंट एग्रीमेंट ही केवल वह दस्तावेज होता है, जो यह साबित कर सकता है, कि वह संपत्ति आपने किराए पर ली है, न कि उस संपत्ति पर अवैध रूप से कब्ज़ा किया हुआ है। इसीलिए किरायानामा आप किसी प्रलेखन के वकील के माध्यम से बनवा सकतें हैं, क्योंकि रेंट एग्रीमेंट में कई प्रकार की क़ानूनी औपचारिकताएं होती हैं, और यदि किसी भी औपचारिकता को पूर्ण नहीं किया गया तो विवाद की स्तिथि भी उत्पन्न हो सकती है, तो ऐसे विवाद से बचने के लिए रेंट एग्रीमेंट को किसी वकील के माध्यम से बनवाना ही बेहतर होता है। जिसके लिए सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर आप किसी अच्छे वकील से सम्पर्क करें। और आप अपना किरायानामा बनवा लें। साथ ही किरायानामा बनवाते समय उपर बताई गयी बातों का ध्यान अवश्य रखें।




 

ये गाइड कानूनी सलाह नहीं हैं, न ही एक वकील के लिए एक विकल्प
ये लेख सामान्य गाइड के रूप में स्वतंत्र रूप से प्रदान किए जाते हैं। हालांकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करते हैं कि ये मार्गदर्शिका उपयोगी हैं, हम कोई गारंटी नहीं देते हैं कि वे आपकी स्थिति के लिए सटीक या उपयुक्त हैं, या उनके उपयोग के कारण होने वाले किसी नुकसान के लिए कोई ज़िम्मेदारी लेते हैं। पहले अनुभवी कानूनी सलाह के बिना यहां प्रदान की गई जानकारी पर भरोसा न करें। यदि संदेह है, तो कृपया हमेशा एक वकील से परामर्श लें।

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