पैतृक संपत्ति कैसे पा सकते हैं


July 03, 2019
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



कानूनी भाषा के अनुसार पुरुषों को चार पीढ़ियों तक जो संपत्ति विरासत में मिली हो उसे पैतृक संपत्ति कहा जाता है। पैतृक संपत्ति में हिस्से का अधिकार किसी व्यक्ति को उसके जन्म के समय से ही मिल जाता है। यह विरासत के अन्य प्रारूपों जैसा नहीं होता, जहां संपत्ति के मालिक के मरने के बाद ही विरासत में संपत्ति मिल सकती है। संपत्ति मुख्यतः दो प्रकार की होती है, एक वो जो ख़ुद से अर्जित की गई हो या खुद के पैसों से खरीदी गयी हो और दूसरी वह जो विरासत या उत्तराधिकार में मिली हो। अपनी कमाई से खड़ी की गई संपत्ति स्वर्जित संपत्ति कही जाती है, जबकि विरासत में मिली संपत्ति पैतृक संपत्ति कहलाती है।

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पैतृक संपत्ति में किसका किसका हिस्सा होता है?

किसी भी व्यक्ति की पैतृक संपत्ति में उनके सभी बच्चों और उसकी पत्नी का बराबर का अधिकार होता है। अर्थात, अगर किसी परिवार में एक व्यक्ति के तीन बच्चे हैं, और उन बच्चों की शादी और बच्चे भी हो चुके हैं, तो उसकी पैतृक संपत्ति का बंटवारा पहले उन तीनों बच्चों में होगा। उसके बाद उन तीनों के बच्चों में उस संपत्ति का बंटवारा होगा, जो संपत्ति उनके पिता के हिस्से में आयी है।

तीनों बच्चों को पैतृक संपत्ति का एक - एक तिहाई मिलेगा और उनके बच्चों और पत्नी को उनकी गिनती के अनुसार बराबर - बराबर हिस्सा मिलेगा। हालांकि मुस्लिम समुदाय इस नियम को नहीं मानता है। इस समुदाय में पैतृक संपत्ति का उत्तराधिकार तब तक दूसरे को नहीं मिलता है, जब तक कि अंतिम पीढ़ी का शख़्स जीवित हो।
 

पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटियों का हिस्सा

दिल्ली की उच्च न्यायालय ने साल 2016, में अपने एक मामले में फैसला दिया था, कि किसी परिवार में बेटे का अपने माता - पिता द्वारा कमाई हुई संपत्ति पर किसी प्रकार का कानूनी हक नहीं है। इस आदेश में यह भी कहा गया था, जहां घर माता - पिता द्वारा बनाया गया हो, वहां बेटे, चाहे वह शादीशुदा हो या कुंवारा, उसका घर में रहने का किसी प्रकार का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, और यदि वह घर में रहता है, तो यह कोई गैर क़ानूनी भी नहीं है। वह सिर्फ और सिर्फ अपने माता - पिता की दया पर ही घर में रह सकता है, और जब उसके माता - पिता चाहें, उस बेटे को घर से जाने के लिए भी कह सकते हैं।

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पैतृक संपत्ति का परिवार वालों के बीच बंटवारा होने के बाद यह पैतृक संपत्ति नहीं रह जाएगी। यह पिता या संपत्ति के मालिक की मर्जी पर निर्भर करता है, कि वह खुद की बनाई हुई संपत्ति अपने बेटे के नाम करता है, या नहीं। लेकिन यदि संपत्ति पैतृक है, तो पिता को वह संपत्ति अपने उत्तराधिकारी या अपने पुत्र के नाम करनी ही होगी।

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 में पैतृक संपत्ति में बेटों के साथ - साथ बेटियों को भी बराबर का उत्तराधिकार का दर्जा दिया गया है। इस कानून में संशोधन से पहले सिर्फ परिवार के पुरुषों या बेटों को ही उत्तराधिकारी का दर्जा दिया जाता था। लेकिन हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, के प्रावधान 6, में संशोधन कर उसमें बेटियों को भी उत्तराधिकारी का दर्जा दिया गया।
 

पैतृक संपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया

आमतौर पर पैतृक संपत्ति के बंटवारे की बात उस संपत्ति के वर्तमान मालिक की मृत्यु के बाद ही की जाती है, क्योंकि पैतृक संपत्ति के मालिक की मृत्यु के बाद ही उस संपत्ति के नए मालिक बनाने की बात सामने आती है। सम्पति के नए मालिक बनाने के लिए कई तरीके हैं, जैसे कि संपत्ति के वर्तमान मालिक जिसकी मृत्यु हो चुकी है, उसकी वसीयत के आधार पर नए मालिक का चुनाव हो सकता है, अगर कोई वसीयत नहीं की गयी है, तो उसके पुत्र या उसके उत्तराधिकारी के नाम पर वह पैतृक संपत्ति हस्तांतरित हो जाती है। पैतृक संपत्ति को अपने नाम पर हस्तांतरित करवाने के लिए एक व्यक्ति को उस संपत्ति के क्षेत्राधिकार वाले सिविल न्यायालय में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के लिए एक आवेदन दर्ज करना होगा। यदि एक व्यक्ति उस पैतृक संपत्ति को अपने नाम पर हस्तांतरित करने कि सभी शर्तों को पूर्ण करता है, तो ही केवल वह उस संपत्ति को प्राप्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकता है।

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न्यायालय द्वारा उन सभी लोगों से उस संपत्ति को हस्तांतरित करने के लिए किसी प्रकार की आपत्ति न होने के लिए पूछा जाता है, जो किसी भी प्रकार से उस संपत्ति से जुड़े हैं, या जिनका उस संपत्ति में बराबर का हिस्सा है। यदि उनमें से किसी भी व्यक्ति को कोई आपत्ति होती है, तो न्यायालय संपत्ति के हस्तांतरण के आवेदन को निरस्त कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति को कोई आपत्ति नहीं होती है, तो न्यायालय उस व्यक्ति को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर देगी, जिससे की वह संपत्ति उस नए मालिक के नाम पर हस्तांतरित हो जाएगी। आवेदन करने के लिए मृतक मालिक के मृत्यु प्रमाण पत्र का होना बहुत ही आवश्यक है, तथा आपको आवेदन के लिए दिए जाने वाले उचित शुल्क का भी भुगतान करना होगा।




 

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