साधारण वसीयत बनाने का तरीका


March 16, 2020
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



एक साधारण वसीयत में किसी भी संपत्ति का प्रत्यक्ष रूप से वितरण का वर्गीकरण किया जाता है, जिसमे किसी भी उपहार का अलग - अलग उल्लेख नहीं किया जाता है। एक साधारण वसीयत में आमतौर पर जीवनसाथी या बड़े बच्चों के लिए पूरी संपत्ति के दान का उल्लेख होता है।

यह मरने वाले व्यक्ति की अंतिम इच्छा और संपत्ति के वितरण का उल्लेख करती है।

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वसीयत क्यों आवश्यक होती है

संपत्ति बंटवारे के मामले में देखा जाये तो वसीयत की अहमियत आम धारणा ही है, कि जो भी संपत्ति हम अपनी मृत्यु के समय छोड़ कर जाते हैं, वह हमारे परिवार को ही मिलेगी। इसके लिए उन्हें ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। जाहिर सी बात है, कि परिवार में आपसी रिश्ते अच्छे होते हैं, इसीलिए हम वसीयत की जरूरत नहीं समझते जिसका खमियाजा हमें बाद में भुगतना पड़ता है। अक्सर संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार में विवाद हो जाता है। परिवार का कोई एक व्यक्ति संपत्ति पर अपना पूरा कानूनी हक होने का दावा करता है, और मामला न्यायालय में भी चला जाता है। जिसका फैसला कई बर्षों बाद होता है, लेकिन तब तक पूरा परिवार संपत्ति के लाभ से वंचित रहता है। अगर किसी ने अपनी वसीयत नहीं लिखी है, और इसे लेकर कुछ विवाद पैदा होता है, तो फैसला किसके हक में जाएगा इसे जानने के लिए आइए इसको विस्तार से समझते हैं। अगर आपने वसीयत लिखी है, तो आपकी संपत्ति का बंटवारा उसके अनुसार ही होता है। हालांकि वसीयत का भी न्यायालय में विरोध किया जा सकता है, उससे निपटने के लिए एक अच्छी पंजीकृत वसीयत लिखी जानी चाहिए। यदि किसी हिन्दू व्यक्ति की मृत्यु वसीयत लिखे बिना ही हो जाती है, तो उसकी संपत्ति का बंटवारा हिन्दू उत्तराधिकार एक्ट 1956 के आधार पर होता है।
 

वसीयत बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें

यदि आप अपनी नयी वसीयत बना रहे हो तो उसके लिए इस बात कि पुस्टि कर लें कि आपके द्वारा बनाई गई पुरानी वसीयत को आप रद्द कर रहे हैं। बनाई गई वसीयत को पंजीकृत कराना आवश्यक नहीं होता परंतु मृत्यु के बाद वसीयत में कोई गड़बड़ी ना हो इसके लिए वसीयत पंजीकृत कराई जा सकती है। गवाहों के साथ सब रजिस्ट्रार के ऑफिस में जाकर वसीयत को पंजीकृत करवाया जा सकता है। वसीयत करने के बाद उसमें हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा दो गवाहों के हस्ताक्षर करने होंगे। पर ध्यान देने योग्य बात यह है, कि जिन लोगों को आप वसीयत कर रहे हैं, वह गवाह नहीं बन सकते। यदि जिस व्यक्ति के नाम पर वसीयत की जा रही है, वसीयत करने के बाद उसकी मृत्यु हो जाती है, तो वसीयत दुबारा बनानी जरूरी होती है।
 

किस - किस चीज की बना​ सकतें हैं वसीयत

आप अपनी चल संपत्ति, जैसे नकद, घरेलू सामान, बैंक में जमा राशि, पी. एफ., शेयर्स, किसी कंपनी की हिस्सेदारी आदि की वसीयत कर सकते हैं। इसके साथ ही आप खुद की कमाई हुई अचल संपत्ति, जैसे जमीन, मकान, दुकान, खेत आदि की भी वसीयत कर सकते हैं। वहीं जो संपति आपके नाम पर है, उसी की ही वसीयत की जा सकती है, ये किसी संपत्ति के एक से अधिक मालिक हैं, तो उनमे से कोई एक मालिक उस संपत्ति की वसीयत नहीं कर सकता है।
 

वसीयत का प्रारूप

 मैं, ______________,पुत्र, श्री _______________ उम्र __ वर्ष,_________________________ के निवासी, खुद के द्वारा बनाई गयी सभी पुरानी वसीयत को अमान्य घोषित करता हूँ। इसके साथ ही मैं इसे अपनी अंतिम इच्छा और वसीयतनामा घोषित करता हूं।

मैं इस समय अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखता हूं, और एक स्वस्थ दिमाग रखता हूं। यह वसीयत मेरे अपने स्वतंत्र निर्णय और स्वतंत्र इच्छा द्वारा की गई है। मैं किसी भी तरह से प्रभावित, या किसी डर या धमकी से प्रभावित नहीं हूँ।

मैं इसके माध्यम से  ________________ को अपनी इस वसीयत के एकमात्र निष्पादक के रूप में नियुक्त करता हूं।

मेरी पत्नी का नाम _________________ है। हमारे दो बच्चे हैं, (1) __________________ (2) ________________, मेरे पास निम्नलिखित अचल और चल संपत्ति है।
1. एक फ्लैट जिसका नंबर _______________________ है।

2. आभूषण, नकदी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र, सार्वजनिक भविष्य निधि, विभिन्न कंपनियों में शेयर, बैंक में कुछ धनराशि भी है।

मेरे स्वामित्व वाली सभी संपत्तियां स्व - अर्जित संपत्ति हैं। मेरे अलावा किसी अन्य के पास इन परिसंपत्तियों या संपत्तियों पर कोई अधिकार, शीर्षक, ब्याज, दावा या मांग नहीं है। मेरे पास इन संपत्तियों पर पूर्ण अधिकार और पूर्ण शक्ति है, या किसी अन्य संपत्ति में जो उनके स्थान या स्थानों पर प्रतिस्थापित किया जा सकता है, जो उसके बाद मेरे द्वारा प्राप्त या प्राप्त किया जा सकता है।

मैं मेरे और मेरी पत्नी की सभी संपत्तियों, चाहे वह चल या अचल हो, चाहे जो भी हो _____________ को वसीयत में देना चाहता हूँ।

मैं इस ____ समय के इस ____ दिन, __ 20 को ____ अपनी संपत्ति वसीयत में देता हूँ


(वसीयत करने वाला व्यक्ति)

उपर्युक्त नामित वसीयत करने वाले व्यक्ति द्वारा उनकी उपस्थिति में अंतिम वसीयत और वसीयतनामा के रूप में नामित, जो हम दोनों की उपस्थिति में सभी बात को पूरी तरह से समझते हैं, और अनुमोदित करते हैं, उसी समय हम लोग अपनी उपस्थिति के साथ ही यहाँ पर साक्षी के रूप में अपने नाम को दर्ज करा रहे हैं।

गवाह:
1
2

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वसीयत बनाने के लिए आपको निम्नलिखित चीजों पर विचार करना चाहिए

  1. वकील की सलाह - वसीयत तैयार करने वाले व्यक्ति को मुख्य रूप से यह तय करना चाहिए कि क्या वह अपने आप से वसीयत का प्रारूप तैयार करना चाहता है, या किसी वकील से परामर्श करना चाहता है। आप अपने आप भी एक वसीयत तैयार कर सकते हैं, लेकिन यह सलाह दी जाती है, कि आप किसी वकील से परामर्श करें, ताकि भविष्य में किसी भी तकनीकी या कानूनी समस्याओं से बचा जा सके।

  2. अपनी परिसंपत्तियों की एक सूची तैयार करें - आपको सभी संपत्तियों की एक सूची तैयार करनी चाहिए। आप केवल स्वयं - प्राप्त या स्व - अर्जित संपत्तियों का ही निपटान कर सकते हैं, अपनी पैतृक संपत्ति का नहीं। अपने परिसंपत्तियों को चल या अचल और देश – विदेश में स्थित संपत्तियों में वर्गीकृत करें। आप इन संपत्ति को उन लोगों को आवंटित करते हैं, जिन्हें आप चाहते हैं। यदि आप किसी संपत्ति में संयुक्त साझेदार हैं, तो केवल विभाजित हिस्सा या ऐसी संपत्ति में ब्याज की ही वसीयत की जा सकती है।

  3. अपनी पूरी जानकारी प्रदान करें - वसीयत बनाते समय आपको अपने नाम, उम्र, के संबंध में आपके स्थायी खाता संख्या (पैन) या आपके आधार कार्ड पर अंकित जानकारी ही प्रदान करनी चाहिए। आपको उन व्यक्तियों के पूर्ण नाम और विवरण का भी उल्लेख करना चाहिए जिनको आप अपनी संपत्ति प्रदान करना चाहते हैं।

  4. एक निष्पादक नियुक्त करें - आपको अपने वसीयत में एक निष्पादक की नियुक्ति भी करनी होगी। एक निष्पादक ऐसा व्यक्ति होता है, जो आपकी इच्छा के अनुसार आपकी संपत्ति को प्रशासित करता है, और विभाजित करता है। निष्पादक को कानूनी औपचारिकताओं और वसीयतकर्ता की इच्छा के अनुसार वसीयत को निष्पादित करना चाहिए।

  5. बकाया ऋण और देनदारियों - वसीयत बनाते समय आपको अपने सभी ऋण दायित्वों पर विचार करना चाहिए। किसी भी बकाया देनदारियों के मामले में, आपको स्पष्ट रूप से लाभार्थी को संपत्ति के वितरण से पहले संपत्ति से मिलने वाली देनदारियों को चुकाने का प्रावधान करना होगा।

  6. डॉक्टर का प्रमाण पत्र - यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी वसीयत को इस आधार पर चुनौती नहीं दे सके कि वसीयतकर्ता चिकित्सकीय रूप से फिट नहीं था। उचित होगा कि आप एक चिकित्सक से एक प्रमाण पत्र प्राप्त करे जिसमें यह उल्लेख हो कि आप दिमागी तौर पर स्वस्थ थे, और आपने जो लिखा है, उसे समझने में भी सक्षम थे।

  7. वसीयत की सुरक्षा - केवल एक वसीयत लिखना ही पर्याप्त नहीं है, आपको इसे सुरक्षित निगरानी में रखने और उचित निष्पादन सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है। इसलिए यह सलाह दी जाती है, कि आपको अपनी वसीयत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी वसीयत को पंजीकृत कराना चाहिए, ताकि वसीयत के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो सके, उसे नष्ट, खोया या चोरी न किया जा सके।
     

वसीयत के निष्पादन की प्रक्रिया क्या होती है?

वसीयत एक व्यक्ति के इरादे की कानूनी घोषणा है, जिसे वह अपनी मृत्यु के बाद निष्पादित करना चाहता है, और एक बार वसीयतकर्ता द्वारा वसीयत करने के बाद इसे केवल अपने जीवनकाल के दौरान ही रद्द किया जा सकता है। कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों की संपत्ति को वसीयत के रूप में नहीं दे सकता है, लेकिन वह केवल अपनी स्व - अर्जित संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी वसीयत में यह लिखता है, कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति जब तक उन लोगों को नहीं मिल जाती जिनके नाम उसने वसीयत की है, तब तक कोई अन्य व्यक्ति उस संपत्ति की देखभाल करेगा, तो ऐसी वसीयत में कोई हस्तांतरण शामिल नहीं होता है, और न ही यह किसी भी ट्रांसफर इंटर - विवो को प्रभावित करता है, लेकिन यह एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करने का इरादा है, जो अपनी (टेस्टेटर) मृत्यु के बाद उस संपत्ति की देखभाल करेगा। एक वसीयत उत्तराधिकार को नियंत्रित करती है, और परीक्षक द्वारा घोषित उत्तराधिकार के लिए प्रदान करता है।
 

साधारण वसीयत बनाने के लिए आवश्यक तत्व

  1. वसीयतकर्ता का विवरण

  2. लाभार्थी का विवरण

  3. निष्पादक का विवरण

  4. संपत्ति का सम्पूर्ण विवरण

  5. संपत्ति की बकाया देनदारियों का हिसाब

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साधारण वसीयत बनाने से सम्बंधित मामले में एक वकील की आवश्यकता क्यों होती है?

भारत की न्यायालयों में अधिकांश मामले संपत्ति या वसीयत में प्राप्त संपत्ति के विवाद से ही जुड़े हुए होते है, जिनमें अधिकतर मामलों में वसीयतकर्ता और लाभार्थी के बीच यह विवाद होता है, कि वसीयत सही से नहीं बनाई गयी थी। आमतौर पर उचित वसीयत बनाने में लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि यह कार्य किसी प्रलेखन के वकील की मदद से किया जाये तो यह काफी हद तक सरल हो सकता है, क्योंकि केवल एक वकील ही वह यन्त्र होता है, जिसके माध्यम से किसी भी प्रकार की वसीयत से सम्बंधित मामलों जैसा कोई भी छोटा या बड़ा क़ानूनी कार्य बड़ी सरलता से किया जा सकता है, तथा एक वकील ही कम समय में और कम खर्चे में वसीयत सम्बंधित मामलों का निपटारा उचित रूप से करवा सकता है। लेकिन इसके लिए यह ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है, कि जिस वकील को हम अपनी वसीयत से जुड़े हुए मामले का निपटारा कराने के लिए नियुक्त करने की सोच रहे हैं, वह अपने क्षेत्र में निपुण वकील हो, और वह पहले भी वसीयत से जुड़े हुए मामलों से जूझ चुका हो, और वह इस तरह के मामलों से निपटने में पारंगत हो, जिससे वह वसीयत बनने के बाद उसमे किसी तरह का विवाद उत्पन्न न हो सके।




 

ये गाइड कानूनी सलाह नहीं हैं, न ही एक वकील के लिए एक विकल्प
ये लेख सामान्य गाइड के रूप में स्वतंत्र रूप से प्रदान किए जाते हैं। हालांकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करते हैं कि ये मार्गदर्शिका उपयोगी हैं, हम कोई गारंटी नहीं देते हैं कि वे आपकी स्थिति के लिए सटीक या उपयुक्त हैं, या उनके उपयोग के कारण होने वाले किसी नुकसान के लिए कोई ज़िम्मेदारी लेते हैं। पहले अनुभवी कानूनी सलाह के बिना यहां प्रदान की गई जानकारी पर भरोसा न करें। यदि संदेह है, तो कृपया हमेशा एक वकील से परामर्श लें।

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