सवाल


तलाक लेने के नियम और तरीके क्या है. हम पति और पत्नी एक दूसरे से बहुत परेशान हैं और अब तलाक लेना चाहते हैं कृपया हमें बताएं कि हम किस प्रकार से तलाक ले सकते हैं?

उत्तर (1)


हिंदू कानून के तहत तलाक लेने के दो तरीके हैं और उन दोनों तरीकों के नियम इस उत्तर में दिए गए हैं. पहला तरीका है म्यूच्यूअल डिवोर्स का और दूसरा तरीका है अस्वीकृत तलाक का. जब पति और पत्नी आपसी रजामंदी से तलाक लेते हैं तो उसको म्यूच्यूअल डिवोर्स कहते हैं और यदि दोनों पत्नी और पत्नी में से एक को तलाक चाहिए हो और दूसरा तलाक के लिए राजी ना हो तो इस तरह की तलाक की अर्जी को अस्वीकृत तलाक कहते हैं.

पहला तरीका है जब आप दोनों की आपस में रजामंदी ना हो तलाक के लिए और इसे बोलते हैं अस्वीकृत तलाक की प्रक्रिया:

अस्वीकृत तलाक के लिए आप कुछ ग्राउंड के बिना पर एक वकील के पास जाकर अपनी अर्जी बनवा कर कोर्ट में फाइल कर सकते हैं. इसके ग्राउंड से हैं:

पहला अगर आप की बीवी के जिंदा होने के बारे में 7 साल से अधिक से कोई खबर नहीं है

दूसरा अगर आपकी बीवी ने अपनी मर्जी से किसी और पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाए हो

तीसरा अगर वह आपके साथ मानसिक तनाव या मारपीट करती हूंv चौथा अगर वह आपको छोड़ कर चली गई हो और उनको आप को छोड़े हुए 2 साल से अधिक हो गए हो

पाचवा अगर उन्होंने अपना धर्म हिंदू धर्म से दूसरे धर्म में बदल लिया हो

छटा यदि उन्हें कोई मानसिक रोग हो गया हो और आप उस मानसिक रोग के चलते उनके साथ ना रह पा रहे हो

सातवां यदि आपकी बीवी को लेप्रोसी हो गई हो

8 यदि उन्हें कोई और ऐसी छुआ छात वाली बीमारी हो गई हो

और आखरी यदि आपकी बीवी ने इस संसार को त्याग दिया हो और वह साध्वी बन गई हो

जब आप इनमे से कोई भी कारण पेश करते हुए अपने नजदीकी फैमिली कोर्ट में हरजी लगाएंगे तो कोर्ट आप की अर्जी को मंजूर करने के बाद आपकी बीवी को बुलाएगा और उनका बयान लिया जाएगा. उसके बाद यह केस 2 से 5 साल चल सकता है जिसमें आप का बयान व उनका बयान लिया जाएगा और अंत में कोल्ड अपना नतीजा सुनाते हुए आपको तलाक दे देगा.

बात करते हैं रजामंदी से तलाक के बारे में जो म्यूच्यूअल डिवोर्स कहलाता है:

हिंदू मैरिज एक्ट 1955 का सेक्शन 13B म्यूच्यूअल डाइवोर्स के बारे में बताता है.

जैसा कि इसके नाम से जाहिर होता है म्यूच्यूअल डिवोर्स तब फाइल करा जा सकता है जब दोनों पति व पत्नी आपसी रजामंदी से तलाक चाहते हो. इस तरह से तलाक की अर्जी केवल तभी लगाई जा सकती है जब आपकी शादी को कम से कम 1 साल हो गया हो. जब आप दोनों ने अलग होने की सारी आप ही शर्ते मंजूर कर ली हो जैसे कि अगर कोई संतान है उसे अपने पास कौन रखेगा, अगर कोई आप ने मिलकर घर लिया है उसको तलाक के बाद कौन रखेगा और अगर कोई खर्चा आपसी में दिया जाना चाहिए. जब यह सब शर्तें आपस में मंजूर हो गई हो तो आप एक वकील के पास जाकर अपने तलाक की अर्जी को बनवाएं और और अपने वकील के जरिए उस आदमी को अपने नजदीकी फैमिली कोर्ट में फाइल करें. आपको अपनी अर्जी में यह भी दिखाना होगा कि आप दोनों 1 साल से अलग अलग रह रहे हैं. कोर्ट आप की अर्जी मंजूर करने के बाद और आप दोनों की गवाही लेने के बाद आपको 6 महीने का टाइम देगा अपने निर्णय को दोबारा सोचने के लिए. 6 महीने के बाद दी गई डेट पर आपको दोबारा कोर्ट जाना होगा और जब आप दोनों कोर्ट जाकर दोबारा अपनी अर्जी पर साइन करेंगे और कोर्ट को बताएंगे कि आप ने सोचने के बावजूद तलाक लेने का फैसला लिया है तो कोर्ट आपको तलाक दे देगा.

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